नयी दिल्ली, 22 अक्टूबर (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) से तैयार सामग्री को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने और बड़े सोशल मीडिया मंचों की जवाबदेही तय करने वाले प्रस्तावित सूचना प्रौद्योगिकी नियमों को विशेषज्ञों ने बुधवार को डिजिटल पारदर्शिता और भरोसे की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
विशेषज्ञों ने कहा कि नियमों में संशोधन होने पर एआई से तैयार सामग्री को चिह्नित करने और पहचान के निशान अनिवार्य करने से उपयोगकर्ताओं को कृत्रिम एवं वास्तविक सामग्री में फर्क करने में मदद मिलेगी।
ईवाई इंडिया में साझीदार और प्रौद्योगिकी सलाहकार प्रमुख महेश मखीजा ने कहा, ‘‘ये कदम कारोबार जगत को नवाचार करने और एआई को जिम्मेदारी से अपनाने का भरोसा देंगे। इसका अगला चरण कार्यान्वयन के लिए स्पष्ट मानक तय करना और सरकार एवं उद्योग के बीच सहयोगी ढांचा विकसित करने का होना चाहिए।’’
ग्रांट थॉर्नटन भारत में साझीदार अक्षय गर्कल ने कहा कि यह संशोधन डीपफेक प्रौद्योगिकी के बेहद विश्वसनीय होते जाने के साथ समय पर उठाया गया और जरूरी कदम है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह देखकर अच्छा है कि सरकार और कानून-प्रवर्तन एजेंसियां इस खतरे को गंभीरता से ले रही हैं और इसे रोकने के लिए सक्रिय हैं।’’
केंद्र सरकार ने बुधवार को आईटी नियमों में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इसमें एआई से तैयार या फेरबदल की गई सामग्री को स्पष्ट रूप से दर्शाना अनिवार्य होगा। इसके साथ 50 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं वाले बड़े सोशल मीडिया मंचों पर कृत्रिम जानकारी को पहचानने और चिह्नित करने की जिम्मेदारी भी बढ़ाई जाएगी।
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