नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) कंपनी सचिवों और लागत लेखाकारों के शीर्ष निकायों ने सरकार से आयकर विधेयक, 2025 में इन पेशेवरों को ‘लेखाकार’ की परिभाषा के तहत शामिल करने की अपील की है।
भारतीय कंपनी सचिव संस्थान (आईसीएसआई) और भारतीय लागत लेखाकार संस्थान (आईसीएमएआई) ने मांग की है कि उनके सदस्यों को विधेयक में लेखाकार के रूप में माना जाए।
इन दोनों संगठनों की स्थापना संसद के अधिनियमों के तहत हुई है और दोनों कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत आते हैं।
आईसीएसआई के करीब 75,000 सदस्य हैं जबकि आईसीएमएआई के करीब एक लाख सदस्य हैं।
आईसीएसआई ने सोमवार को बयान में कहा कि कंपनी सचिवों को विधेयक की धारा 515 (3) (बी) में उल्लिखित ‘लेखाकार’ की परिभाषा में शामिल किया जाना चाहिए।
बयान में कहा गया कि उनका नाम शामिल नहीं करने को देश के वित्तीय और अनुपालन परिदृश्य में कंपनी सचिव की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने में एक चूक के रूप में देखा जा रहा है।
आईसीएसआई के अध्यक्ष धनंजय शुक्ला ने कहा कि कर नियमों के अनुपालन को सुनिश्चित करने वाले योग्य पेशेवरों के एक बड़े समूह के लिए यह जरूरी है कि कंपनी सचिवों को विधेयक में ‘लेखाकार’ की परिभाषा में शामिल किया जाए।
आईसीएमएआई के अध्यक्ष विभूति भूषण नायक ने कहा, ‘‘यह हमें दिए गए आश्वासन के विपरीत है कि सभी पेशेवरों को समान अवसर दिए जाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि परिषद नीति-निर्माताओं के संपर्क में है और लागत लेखाकारों की वैध स्थिति को आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
वित्त मंत्रालय की ओर से दोनों संस्थानों की मांगों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की गई।
भाषा पाण्डेय अजय
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