नयी दिल्ली, 15 जनवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मुंबई स्थित रियल एस्टेट कंपनी सुरक्षा ग्रुप के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कंपनी पर जयप्रकाश इन्फ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) के करीब 230 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को कथित तौर पर दूसरी जगह भेजने का आरोप है।
यह राशि जेआईएल की आवासीय परियोजनाओं में बुकिंग करने वाले खरीदारों के लटके हुए फ्लैट का निर्माण पूरा करने के लिए निर्धारित थी।
सूत्रों ने पीटीआई-भाषा से कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दिल्ली पुलिस की इस प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए सुरक्षा ग्रुप और अन्य के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज कर सकता है।
सुरक्षा ग्रुप ने चार जून, 2024 को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के फैसले के बाद जेपी समूह की कंपनी जेआईएल का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था।
जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया अगस्त, 2017 में शुरू हुई थी। इसके बाद सात मार्च, 2023 को राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने सुरक्षा ग्रुप की तरफ से पेश कर्ज समाधान योजना को मंजूरी दी थी।
सूत्रों के मुताबिक, एक जनवरी 2026 को रियल्टी कंपनी के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी ईडी द्वारा साझा किए गए इनपुट और सबूतों के आधार पर दर्ज की गई है। इसमें सुरक्षा ग्रुप, उससे जुड़ी इकाई लक्षदीप इन्वेस्टमेंट्स एंड फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड और कुछ अन्य को आरोपी बनाया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय जेपी समूह की कंपनियों- जेआईएल और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) और उनसे जुड़ी इकाइयों की धनशोधन जांच कर रहा है। यह जांच नोएडा की जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स आवासीय परियोजनाओं के घर खरीदारों से जुटाई गई धनराशि के कथित बड़े पैमाने पर दुरुपयोग से जुड़ी है।
ईडी ने जून, 2025 में पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत दिल्ली पुलिस के ईओडब्ल्यू को भेजे पत्र में दावा किया था कि उसकी जांच में सुरक्षा ग्रुप को जेआईएल के बहीखाते से 235 करोड़ रुपये दूसरी जगह भेजना पाया गया है।
इस घटनाक्रम पर सुरक्षा ग्रुप की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
हालांकि, रियल एस्टेट कंपनी ने इसी सप्ताह जारी एक बयान में कहा था कि उसने नोएडा में 63 आवासीय टावर में करीब 6,000 फ्लैटों का निर्माण पूरा कर लिया है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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