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Monday, 23 March, 2026
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दिल्ली मेट्रो के पास नहीं है डीएएमईपीएल को देने के लिए पैसे, अदालत ने जताई हैरानी

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नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को इस बात पर आश्चर्य जताया कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) अब कह रही है कि उसके पास रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के स्वामित्व वाली दिल्ली मेट्रो एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड (डीएएमईपीएल) को मध्यस्थता आदेश के तहत देने के लिए पैसे नहीं हैं, जबकि उसकी स्थापना दो निर्वाचित सरकारों ने की है।

अदालत ने डीएमआरसी के सक्षम प्राधिकार को सुनवाई में भाग लेने को कहा, ताकि निगम के पास उपलब्ध धन के संबंध में एक व्यापक जानकारी पाई जा सके।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने कहा, ”मेरे सामने दो संप्रभु और निर्वाचित सरकारें हैं, जिन्होंने इस निगम की स्थापना की है और हमें बताया गया है कि आदेश का सम्मान करने के लिए इसके पास पैसे नहीं हैं।”

उन्होंने आगे की सुनवाई के लिए मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध किया।

पिछले वर्ष 10 मार्च को उच्च न्यायालय ने डीएमआरसी को निर्देश दिया था कि दो महीने के भीतर वह डीएएमईपीएल को दो बराबर किस्तों में 4,600 करोड़ रुपये से अधिक का मध्यस्थता भुगतान ब्याज समेत करे।

केंद्र और दिल्ली सरकार के वकीलों ने कहा कि वे निगम के मध्यस्थता निर्णय का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं। इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि बाहर भेजे जा रहे संदेश की कल्पना करें।

अदालत ने कहा, ”यह आश्चर्यजनक है कि दो निर्वाचित सरकारें हैं, जिन्होंने इस निगम की स्थापना की है। दो सरकारों द्वारा स्थापित निगम के पास कोई पैसा नहीं है… कल्पना कीजिए कि आप बाहर क्या संदेश दे रहे हैं कि एक सरकारी निगम है, जो एक मध्यस्थता निर्णय का पालन करने से इनकार कर रहा है।”

अदालत ने कहा कि 14 फरवरी 2022 तक ब्याज सहित आदेश की कुल राशि 8009.38 करोड़ रुपये थी। इसमें से डीएमआरसी द्वारा अब तक 1678.42 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है और 6330.96 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना बाकी है।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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