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Tuesday, 24 February, 2026
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वैकल्पिक कर व्यवस्था में कटौती की अनुमति मिले, 30 प्रतिशत कर की सीमा बढ़े: विशेषज्ञ

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नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) कर विशेषज्ञों ने कहा है कि आगामी आम बजट में वैकल्पिक कर व्यवस्था को आकर्षक बनाने के लिए इसमें पीपीएफ और अन्य कर बचत योजनाओं के जरिए कटौती की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अधिकतम 30 प्रतिशत कर स्लैब की सीमा को भी 20 लाख रुपये तक बढ़ाने की मांग की है।

सरकार ने आम बजट 2020-21 में वैकल्पिक आयकर व्यवस्था शुरू की थी जिसमें व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) पर कम दरों के साथ कर लगाया गया। हालांकि, इस व्यवस्था में किराया भत्ता, आवास ऋण के ब्याज और 80सी के तहत निवेश जैसी अन्य कर छूट नहीं दी जाती है।

इसके तहत 2.5 लाख रुपये तक की कुल आय कर मुक्त है। इसके बाद 2.5 लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक की कुल आय पर पांच फीसदी, पांच लाख रुपये से 7.5 लाख रुपये तक की कुल आय पर 10 फीसदी, 7.5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक की आय पर 15 फीसदी, 10 लाख रुपये से 12.5 लाख रुपये तक की आय पर 20 फीसदी, 12.5 लाख रुपये से 15 लाख रुपये तक आय पर 25 फीसदी और 15 लाख रुपये से ऊपर आय पर 30 फीसदी की दर से कर लगाया जाता है।

हालांकि, इस योजना ने करदाताओं का अधिक ध्यान नहीं खींचा, क्योंकि कई मामलों में इसे अपनाने पर करदाता को अधिक कर देना पड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैकल्पिक कर व्यवस्था को आकर्षक बनाने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को आगामी बजट मे कर-मुक्त आय और उच्चतम कर दर की सीमा बढ़ाने के अलावा कुछ लोकप्रिय कर कटौती को भी शामिल करना चाहिए।

नांगिया एंडरसन इंडिया के चेयरमैन राकेश नांगिया ने कहा कि सरकार को वैकल्पिक कर व्यवस्था में कर दरों को अधिक तर्कसंगत बनाना चाहिए। उन्होंने इसे पूर्वगामी कटौतियों या छूटों के अनुरूप बनाने की पैरोकारी की।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर सुधाकर सेथुरमन ने इसी तरह की राय व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार कुछ कटौतियों की अनुमति देने पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया को जटिल बनाए बिना ऐसा करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस योजना में भी जीवन बीमा प्रीमियम, आवास ऋण का ब्याज और अन्य कटौती दी जा सकती हैं।

भाषा पाण्डेय प्रेम

प्रेम

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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