नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) दूरसंचार विभाग की शीर्ष निर्णायक इकाई डिजिटल संचार आयोग (डीसीसी) ने मंगलवार को दूरसंचार नियामक ट्राई से उपग्रह संचार स्पेक्ट्रम पर की गई सिफारिशों के कुछ पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा।
सूत्रों ने कहा कि डीसीसी ने भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) की अनुशंसाओं पर चर्चा के लिए आयोजित बैठक में शहरी ग्राहकों से प्रस्तावित शुल्क और वार्षिक न्यूनतम स्पेक्ट्रम शुल्क को लेकर सवाल उठाए हैं।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक, भारती-समर्थित यूटेलसैट वनवेब और रिलायंस जियो-एसईएस जैसी कंपनियां भारत में उपग्रह आधारित ब्रॉडबैंड सेवाओं के बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, डीसीसी का मानना है कि शहरी क्षेत्रों से प्रति ग्राहक प्रति वर्ष 500 रुपये अतिरिक्त शुल्क वसूलने की ट्राई की सिफारिश लागू करने में कठिनाई हो सकती है। दूरसंचार विभाग का मत है कि ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान करना और उसके लिए अलग बिल तैयार करने से संबंधित चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
इसके अलावा, 3,500 रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज वार्षिक न्यूनतम स्पेक्ट्रम शुल्क वसूलने के ट्राई के सुझाव पर भी सवाल उठाए गए हैं।
इस पर विभाग का मत है कि स्पेक्ट्रम जैसे मूल्यवान संसाधन के लिए यह राशि कम है और इससे ‘स्पेक्ट्रम धारिता’ पर अंकुश नहीं लगेगा। विभाग का मानना है कि शुल्क अधिक होना चाहिए ताकि मूल्यवान संसाधन अनुपयोगी न पड़ा रहे।
ट्राई ने मई में जारी अपनी सिफारिशों में उपग्रह इंटरनेट सेवा के प्रदाताओं पर वार्षिक राजस्व का चार प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया था। इसके अलावा शहरी उपभोक्ताओं के लिए प्रति वर्ष 500 रुपये का अतिरिक्त शुल्क और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं रखने की बात कही थी।
वर्तमान में स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सेटेलाइट कम्युनिकेशंस को सेवाएं शुरू करने के लिए लाइसेंस मिल चुका है, जबकि अमेजन कुइपर का आवेदन अभी विचाराधीन है।
सरकार ने इस साल कड़े सुरक्षा मानक भी तय किए हैं, जिनमें कानूनी इंटरसेप्शन की व्यवस्था, देश के भीतर डेटा प्रसंस्करण और जमीनी खंड का 20 प्रतिशत स्थानीयकरण अनिवार्य किया गया है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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