मुंबई, दो मार्च (भाषा) भारत का चालू खाते का घाटा (कैड) चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में बढ़कर 13.2 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.3 प्रतिशत हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.1 प्रतिशत) था।
यह वृद्धि मुख्य रूप से व्यापार घाटे में वृद्धि के कारण हुई है।
हालांकि, चालू खाते का घाटा अप्रैल-दिसंबर, 2025 की अवधि में घटकर 30.1 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का एक प्रतिशत) रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 36.6 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) था।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, ‘भारत का चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 13.2 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) हो गया है, जो वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.1 प्रतिशत) था।
समीक्षाधीन तिमाही में वस्तु व्यापार घाटा 93.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 79.3 अरब अमेरिकी डॉलर था।
भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया कि इस अवधि के दौरान शुद्ध सेवा प्राप्तियां बढ़कर 57.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गईं, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 51.2 अरब डॉलर थीं।
भाषा योगेश अजय
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