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Friday, 6 March, 2026
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बीते वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा जीडीपी का 1.2 प्रतिशत पर

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मुंबई, 22 जून (भाषा) देश का चालू खाते का घाटा (कैड) वित्त वर्ष 2021-22 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.2 प्रतिशत रहा जबकि वित्त वर्ष 2020-21 में 0.9 प्रतिशत अधिशेष की स्थिति थी। मुख्य रूप से व्यापार घाटा बढ़ने से कैड बढ़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को यह जानकारी दी।

आरबीआई के अनुसार, चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2021-22 की मार्च तिमाही में 13.4 अरब डॉलर यानी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.5 प्रतिशत रहा, जो इससे पूर्व दिसंबर तिमाही में 22.2 अरब डॉलर यानी जीडीपी का 2.6 प्रतिशत था।

चालू खाता घाटा तब होता है जब किसी विशेष अवधि में आयातित वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य तथा अन्य भुगतान निर्यात की गई वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य तथा अन्य प्राप्ति की तुलना में अधिक होता है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2021-22 में बढ़कर 189.5 अरब डॉलर हो गया, जो इससे पूर्व 2020-21 में 102.2 अरब डॉलर था। इसके कारण चालू खाते का घाटा बढ़ा है। यह देश की बाह्य ताकत को बताता है।

भुगतान संतुलन के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में भारत का आयात 618.6 अरब डॉलर का रहा, जबकि एक साल पहले यह 398.5 अरब डॉलर था। इससे व्यापार घाटा बढ़ा है।

भाषा जतिन रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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