नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) दूसरे देशों में मौजूद 56 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) वर्तमान में सरकार के ‘ई-जागृति’ मंच का इस्तेमाल कर भारत में संपत्ति और सेवाओं से संबंधित उपभोक्ता शिकायतों का निवारण कर रहे हैं।
यह दर्शाता है कि प्रौद्योगिकी अब दूसरे देश में बैठे उपभोक्ताओं को भी इंसाफ दिलाने में मददगार बन रही है।
उपभोक्ता मामले मंत्रालय की सचिव निधि खरे ने उद्योग मंडल फिक्की के एक कार्यक्रम में कहा कि यह डिजिटल पहल विदेश में रहने वाले उपभोक्ताओं को भारत में मामलों की पैरवी के लिए शारीरिक उपस्थिति या कानूनी प्रतिनिधित्व की जरूरत के बगैर अपना मामला उठाने में सक्षम बनाती है।
खरे ने कहा, “शंघाई में रहने वाली एक एनआरआई महिला ने हमसे संपर्क किया। उन्होंने अपने माता-पिता के लिए एक अपार्टमेंट खरीदा था जिसमें कुछ दिक्कत आ रही थी और वह यह मामला उठाना चाहती थीं। उन्होंने कोई वकील न कर सीधे शंघाई से ही यह मामला उठाने की बात कही। हम ई-जागृति के जरिये उनकी मदद कर रहे हैं।”
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का यह मंच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई करता है, जिससे शिकायतकर्ता दूर से ही सुनवाई का हिस्सा बन सकते हैं। इसके भीतर विवादों को तीन से पांच महीनों में सुलझाने का लक्ष्य सुनिश्चित होता है।
खरे ने कहा, “प्रौद्योगिकी ने शिकायत निवारण में पहुंच, किफायत और रफ्तार को बेहतर बनाया है। आप विश्वास नहीं करेंगे कि हम दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बैठे करीब 56 एनआरआई के मामलों का समाधान कर रहे हैं।”
ई-जागृति प्रणाली केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं है। जब उपभोक्ता मुआवजा चाहते हैं या दोषी पक्ष पर कार्रवाई चाहते हैं, तब ऐसे मामले मुकदमेबाजी प्रकोष्ठ को भेज दिए जाते हैं।
यह पहल उपभोक्ता मामले विभाग के तहत जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों को एक मंच पर लाती है। उपभोक्ता ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं, मामले की स्थिति ट्रैक कर सकते हैं और अपने अधिकारों एवं शिकायत निवारण प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।
ई-जागृति प्रणाली में ऑनलाइन फीस भुगतान, मामले की निगरानी और एआई आधारित पिछले मामलों की खोज जैसी सुविधाएं भी हैं।
मंत्रालय ने कहा कि वह उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं प्रदान करने और शासन को मजबूत करने के लिए नई प्रौद्योगिकी का लगातार उपयोग कर रहा है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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