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Monday, 16 March, 2026
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बड़े जहाजों के निर्माण को मिला अवसंरचना क्षेत्र का दर्जा

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नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने के लिए अब बड़े जहाजों के निर्माण एवं संचालन को अवसंरचना क्षेत्र का दर्जा दे दिया है।

वित्त मंत्रालय की तरफ से एक गजट अधिसूचना के मुताबिक, अब भारतीय स्वामित्व और ध्वज वाले 10,000 टन या उससे अधिक वहन क्षमता वाले वाणिज्यिक जहाजों को अवसंरचना क्षेत्र का दर्जा मिलेगा।

इसके अलावा, भारत में निर्मित 1,500 टन या उससे अधिक क्षमता के भारतीय स्वामित्व वाले जहाजों को भी यह सुविधा दी जाएगी।

वित्त मंत्रालय ने 19 सितंबर को जारी अधिसूचना में कहा कि बड़े जहाजों को ‘ढांचागत उप-क्षेत्रों की मानकीकृत सूची’ (एचएमएल) के तहत परिवहन एवं लॉजिस्टिक श्रेणी में नए उप-क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया है।

सरकार का यह निर्णय वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पेश बजट में की गई घोषणा के अनुरूप है।

ढांचागत क्षेत्र का दर्जा मिलने से जहाज उद्योग को कई लाभ मिलेंगे। अब उनके लिए विदेशों से आसान वित्तपोषण, कर-मुक्त बॉन्ड के जरिये धन जुटाने की सुविधा, कर छूट और आईआईएफसीएल जैसे समर्पित ऋणदाताओं एवं ऋण कोषों तक पहुंच आसान हो जाएगी।

भारत ने 2016 में ‘जहाज निर्माण स्थल’ को अवसंरचना क्षेत्र की सूची में जगह दी थी। फिलहाल इस सूची में पांच मुख्य क्षेत्र और 38 उप-क्षेत्र हैं। मुख्य क्षेत्रों में परिवहन, ऊर्जा, जल एवं स्वच्छता, संचार और सामाजिक एवं वाणिज्यिक अवसंरचना शामिल हैं।

मेरिटाइम इंडिया विजन-2030 के मुताबिक, भारतीय जहाजरानी कंपनियों को जरूरी वित्त के अभाव में अपनी वहन क्षमता बढ़ाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

बजट 2025-26 में 25,000 करोड़ रुपये का समुद्री-वहन विकास कोष स्थापित करने की घोषणा भी की गई थी, जो जहाज खरीद के वित्तपोषण में सीधे मदद करेगा।

सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक भारतीय ध्वज वाले जहाजों का वैश्विक मालढुलाई में हिस्सा 20 प्रतिशत तक बढ़ जाए। इस कोष के जरिये वर्ष 2030 तक जहाजरानी क्षेत्र में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की उम्मीद है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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