नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोयला ब्लॉक के आवंटन का पत्र धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ‘संपत्ति’ की श्रेणी में आता है।
इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि आधुनिक समय में अमूर्त संपत्तियों का कानूनी और वाणिज्यिक महत्व काफी बढ़ गया है।
न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटन पत्र सरकार से खनन पट्टा हासिल करने और कोयले के उत्खनन का अधिकार प्रदान करने वाला दस्तावेज है।
पीठ ने यह टिप्पणी 2022 में दिए गए एकल पीठ के उस फैसले को पलटते हुए की, जिसमें कहा गया था कि सिर्फ कोयला ब्लॉक के महज आवंटन को पीएमएलए कानून के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति नहीं माना जा सकता है।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा, “चूंकि आवंटन पत्र ने धनशोधन की प्रक्रिया को संभव बनाया, लिहाजा यह पत्र न केवल प्रासंगिक है बल्कि अधिनियम की योजना के तहत धनशोधन में संलिप्त संपत्ति भी है।”
न्यायालय ने कहा, “आधुनिक समय में, और खासकर धनशोधन अधिनियम की धारा 2(1)(वी) में वर्णित संपत्ति की परिभाषा में प्रयुक्त शब्दों से स्पष्ट है कि अमूर्त संपत्तियों ने कानूनी और वाणिज्यिक दृष्टि से अत्यधिक महत्व प्राप्त कर लिया है।”
पीठ ने यह भी कहा कि बौद्धिक संपदा कानूनों के विकास के साथ अब कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, डिजाइन अधिकार, पेटेंट, लाइसेंस, डिजिटल संपत्ति और संविदात्मक अधिकार जैसी अमूर्त संपत्तियां भी सामान्य विधि व्यवस्था के तहत मूल्यवान संपत्ति के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुकी हैं।
यह टिप्पणी अदालत ने एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
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