नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के एक संशोधित ढांचे के तहत सहकारी बैंक अब आधार सक्षम भुगतान सेवाएं दे सकेंगे। इस पहल का मकसद गांवों और छोटे शहरों में डिजिटल वित्तीय सेवाओं का विस्तार करना है।
सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में इस नए ढांचे पर एक कार्यशाला को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि यह पहल सहकारी बैंकों को अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर वित्तीय संस्थान बनाएगी।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार भूटानी ने कहा, ”इससे गांवों और छोटे शहरों में वित्तीय समावेश बढ़ेगा। यह समावेशी विकास के सरकार के लक्ष्य के अनुरूप है।”
यह नया ढांचा उन दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान करता है, जिनके कारण सहकारी बैंक अनुपालन और लागत संबंधी समस्याओं के कारण आधार प्रमाणीकरण परिवेश से बाहर रहे हैं।
यूआईडीएआई ने सहकारिता मंत्रालय, नाबार्ड, एनपीसीआई और सहकारी बैंकों के परामर्श से यह सरलीकृत प्रणाली तैयार की है।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) भुवनेश कुमार ने कहा, ”संशोधित ढांचा एक मजबूत और दूरदर्शी व्यवस्था है, जो देश भर के सहकारी बैंकों को आधार सक्षम प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी सेवाओं को अपनाने की सुविधा देगा।”
नाबार्ड के चेयरमैन शाजी केवी ने इस ढांचे को लागू करने के लिए सहकारी बैंकों को पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
भाषा पाण्डेय रमण
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