नई दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) मेक्सिको स्थित अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं सुधार केंद्र (सीआईएमएमवाईटी) गेहूं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जीन संपादन प्रौद्योगिकी में निवेश बढ़ा रहा है।
संस्था के महानिदेशक ब्रैम गोवार्ट्स ने आनुवंशिक रूप से संपादित गेहूं के सामने मौजूदा नियामकीय और तकनीकी चुनौतियों के बीच इसे भविष्य की तकनीक बताया है।
उन्होंने पीटीआई-भाषा को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि जीएम या ‘ट्रांसजेनिक’ गेहूं की किस्में व्यावसायिक सफलता हासिल करने में विफल रही हैं। उन्होंने ट्रांसजेनिक किस्मों को थोड़ी पुरानी तकनीक बताया।
गेहूं की फसलों में सूखा, बाढ़ और रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की इस तकनीक के बारे में गोवार्ट्स ने कहा, ‘‘हम जीन संपादन में अधिक से अधिक निवेश कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि पारंपरिक आनुवंशिक संशोधन के विपरीत, जीन संपादन में बाहरी जीन डाले बिना, उसी फसल प्रजाति में सटीक परिवर्तन करके पारंपरिक प्रजनन को गति दी जाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘सीआईएमएमवाईटी जीन-संपादित गेहूं पर काम कर रहा है। हमें लगता है कि यह एक ऐसी तकनीक है, जो कारगर साबित हो सकती है।’’
उन्होंने पारंपरिक प्रजनन से लेकर जैव प्रौद्योगिकी तक, सभी विकल्पों को खुला रखने के लिए संगठन की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
भाषा पाण्डेय अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
