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Monday, 23 March, 2026
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बाजार में वर्चस्व की मौजूदा स्थिति को बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं कुछ नियामक मानदंड: सीईए

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नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) नियामकों द्वारा लागू किए जाने वाले कुछ मानदंड बाजार में वर्चस्व की मौजूदा स्थिति को बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं। देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने इसके लिए खासतौर से प्रौद्योगिकी क्षेत्र में डाटा और निजता नियमों का हवाला दिया।

उन्होंने यहां भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि हालांकि प्रतिस्पर्धा से नवाचार को बढ़ावा मिलता है, लेकिन यह ध्यान देने की जरूरत है कि प्रतिस्पर्धा और मुक्त बाजार में अंतर है।

सीईए ने कहा कि प्रतिस्पर्धा एजेंसियों को उनकी कार्रवाई के ऐसे नतीजों पर भी ध्यान देना चाहिए, जो उन्होंने नहीं चाहे नहीं थे।

नागेश्वर ने कहा, ”प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, नियामकों द्वारा बनाए गए डाटा और निजता कानून से यह सुनिश्चित होता है कि उपयोगकर्ताओं की जानकारी उनकी पहुंच में रहे। ऐसी स्थिति में उपयोगकर्ता सिर्फ बड़ी कंपनियों के साथ जाएंगे, क्योंकि वे उन पर काफी हद तक भरोसा करते हैं। इससे आखिरकार प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचता है और ताकत सिर्फ कुछ लोगों के पास रह जाती है।”

उन्होंने कहा कि इस तरह अच्छे इरादे के साथ किए गए फैसले से आखिरकार बाजार में वर्चस्व की मौजूदा स्थिति को ही बढ़ावा मिला।

नागेश्वर ने यह भी कहा कि बैंक, बीमा और प्रतिभूति जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा भी अवांछनीय है।

उन्होंने कहा, ”प्रतिस्पर्धा अन्य क्षेत्रों को अधिक आकर्षक बना सकती है, लेकिन उसकी अधिकता से इन क्षेत्रों में प्रणालीगत अस्थिरता आ सकती है।”

सीईए ने कहा कि नियामक और प्रतिस्पर्धा एजेंसियां बाजार में अवरोध पैदा होने से रोकने के लिए एक ढांचा तैयार करने की दिशा में काम कर सकते हैं।

भाषा अनुराग पाण्डेय रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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