ईटानगर, छह जनवरी (भाषा) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि कृषि देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है और इसके विकास के लिए केंद्र से होने वाले वित्त पोषण की कोई बाधा नहीं आएगी।
उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इस इलाके में जैविक खेती की संभावनाओं को देखते हुए केंद्र और पूर्वोत्तर राज्यों की सरकारें कृषि क्षेत्र को विकसित करने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।
तोमर ने बृहस्पतिवार को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले में पासीघाट कृषि महाविद्यालय के नवनिर्मित प्रशासनिक और शैक्षणिक भवनों का उद्घाटन करते हुए कहा, ‘कृषि क्षेत्र के विकास के लिए केंद्रीय वित्त पोषण की कोई बाधा नहीं होगी। कृषि देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है और केंद्र खेती को लाभदायक बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि केंद्र ने अनुसंधान और खेती के बीच एक कड़ी स्थापित करने और जमीनी स्तर पर किसानों को वैज्ञानिक सलाह देने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना के अनुरूप इस शैक्षणिक संस्थान की स्थापना से अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के साथ अरुणाचल प्रदेश में कृषि शिक्षा और अनुसंधान के विकास को गति मिलेगी।
तोमर ने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर में विकास और आजीविका की सुरक्षा के लिए कृषि को महत्व देते हुए कृषि शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से कृषि गतिविधियों को मजबूत किया जा रहा है।’’
शुक्रवार को जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, तोमर ने इस कार्यक्रम में कहा कि केंद्र यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि कृषि क्षेत्र हर समय पर्याप्त खाद्य भंडार सुनिश्चित करने के लिए सभी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हो।
उन्होंने कहा कि खेती को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान संस्थानों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं और कृषि विश्वविद्यालयों को इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।
उन्होंने पूर्वी सियांग जिले के लोगों को इस संस्थान की शुरुआत पर बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि स्नातक होने के बाद यहां के छात्र देश के कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने में सक्रिय योगदान देंगे। तोमर ने कॉलेज परिसर में आयोजित दो दिवसीय किसान मेले का भी दौरा किया और किसानों से बातचीत की।
इस मौके पर अरुणाचल के कृषि मंत्री तागे ताकी ने किसानों की आय बढ़ाने, निर्यात के अवसरों और उत्पादन में सतत वृद्धि के लिए प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए स्थानीय रूप से उगाई जाने वाली फसलों के महत्व पर जोर दिया।
भाषा राजेश राजेश प्रेम
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