नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 2018 में निकाली गई मृदा परीक्षण निविदाओं में बोली के दौरान मिलीभगत करने और बोली में गड़बड़ी के मामले में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के आदेश को बरकरार रखा है।
सीसीआई ने अप्रैल, 2022 में ऑस्टेयर सिस्टम्स, टॉयफोर्ट और फिमो इन्फोसोल्यूशंस को निविदाओं में मिलीभगत कर प्रतिस्पर्धा-रोधी गतिविधियां अपनाने का दोषी पाया था।
आयोग ने कहा था कि ये तीनों फर्म पारिवारिक एवं कारोबारी संबंधों के जरिये एक-दूसरे से जुड़ी हुई थीं। इस तरह निविदाओं में दिखावटी प्रतिस्पर्धा पैदा की गई ताकि ऑस्टेयर सिस्टम्स को लाभ मिल सके।
एनसीएलएटी ने सीसीआई के इन निष्कर्षों से सहमति जताते हुए तीनों फर्मों पर 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के औसत कारोबार का पांच प्रतिशत जुर्माना लगाने के आदेश को बरकरार रखा।
न्यायाधिकरण ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और व्यक्तियों के आचरण से यह स्पष्ट है कि यह प्रत्यक्ष प्रमाण वाला मामला है और प्रतिस्पर्धा-रोधी प्रथाओं का स्पष्ट उदाहरण है।
इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया कि यश सॉल्यूशंस और ऑस्टेयर सिस्टम्स ने आपसी समझौते से भौगोलिक आधार पर निविदाओं का बंटवारा कर लिया और एक-दूसरे के क्षेत्र में या तो बोली नहीं लगाई या फिर सांकेतिक बोली लगाई।
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