नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना ‘उड़ान’ (उड़े देश का आम नागरिक) के संशोधित प्रारूप को मंजूरी दे दी। अगले 10 साल के लिए 28,840 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना के तहत हवाई अड्डों के विकास, उनके रखरखाव और भारत में निर्मित विमानों की खरीद के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।
एयरलाइन कंपनियों को इन मार्गों पर उड़ानों के परिचालन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने (वीजीएफ) के लिए वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होने वाली 10 साल की अवधि में 10,043 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों को बताया कि संशोधित योजना के तहत राज्यों के सहयोग से मौजूदा 100 हवाई पट्टियों को हवाई अड्डों के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए अगले आठ वर्षों में 12,159 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, योजना का लक्ष्य अगले आठ वर्षों में 3,661 करोड़ रुपये की लागत से 200 आधुनिक हेलीपैड बनाना है। इनका विकास मुख्य रूप से पिछड़े जिलों में अंतिम छोर तक पहुंच और आपातकालीन सेवाओं के लिए होगा।
विमानों और हेलीपोर्ट के रखरखाव के लिए तीन साल तक वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके तहत प्रति हवाई अड्डा अधिकतम 3.06 करोड़ रुपये सालाना और प्रति हेलीपोर्ट या जल विमान केंद्र के लिए 90 लाख रुपये सालाना की मदद मिलेगी। करीब 441 ऐसे केंद्रों के लिए कुल 2,577 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
दुर्गम और कठिन क्षेत्रों में छोटे विमानों और हेलिकॉप्टर की कमी को दूर करने तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बढ़ावा देने के लिए योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) से पवन हंस के लिए दो ‘ध्रुव’ हेलिकॉप्टर और अलायंस एयर के लिए दो ‘डोर्नियर’ विमान खरीदने का भी प्रस्ताव है।
संशोधित ‘उड़ान’ योजना को वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक की अवधि के लिए मंजूरी दी गई है। कुल 28,840 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली इस योजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
सरकार के अनुसार, अक्टूबर, 2016 में इस योजना की शुरुआत से लेकर इस साल 28 फरवरी तक 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और जल विमान केंद्रों (वॉटर एयरोड्रम) के माध्यम से 663 हवाई मार्ग शुरू किए जा चुके हैं।
भाषा सुमित अजय
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