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Friday, 6 March, 2026
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बैटरी भंडारण विनिर्माण योजना तय समयसीमा के अनुरूप आगे बढ़ रही: रिलायंस

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नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सोमवार को कहा कि बैटरी भंडारण विनिर्माण से जुड़ी उसकी योजनाओं में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ये तय समयसीमा के अनुरूप आगे बढ़ रही हैं।

चीन से प्रौद्योगिकी नहीं मिलने के बाद भारत में लिथियम-आयन बैटरी सेल बनाने की योजना रोकने से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने यह स्पष्टीकरण दिया।

कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि सेल से लेकर कंटेनराइज्ड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ईएसएस) तक विश्वस्तरीय बैटरी भंडारण विनिर्माण परिवेश तैयार करने की हमारी योजनाओं में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ये हमारी लक्षित समयसीमा के अनुरूप अच्छी तरह प्रगति पर हैं।”

रिलायंस ने पहले संकेत दिया था कि वह 2026 से बैटरी सेल का विनिर्माण शुरू करेगी।

कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने अगस्त, 2025 में कहा था कि रिलायंस की बैटरी गीगा फैक्ट्री 2026 में शुरू हो जाएगी, जिसकी प्रारंभिक क्षमता 40 गीगावाट-घंटा प्रति वर्ष होगी और इसे चरणबद्ध ढंग से बढ़ाकर 100 गीगावाट-घंटा प्रति वर्ष किया जाएगा।

कंपनी प्रवक्ता ने कहा कि बैटरी समेत नए ऊर्जा कारोबार से जुड़ी अद्यतन सूचनाएं नियमित रूप से तिमाही निवेशक कॉल में साझा की जाती रही हैं। इस बारे में अगली सूचना 16 जनवरी को तीसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा के दौरान दी जा सकती है।

प्रवक्ता ने कहा, “बीईएसएस का विनिर्माण, बैटरी पैक और सेल विनिर्माण शुरू से ही हमारी ऊर्जा भंडारण योजनाओं का हिस्सा रहे हैं और इनके क्रियान्वयन में हम पहले से साझा की गई जानकारी के हिसाब से अच्छी प्रगति कर रहे हैं।”

बीईएसएस विनिर्माण का मतलब बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का निर्माण है। यह बाद में उपयोग के लिए बिजली का संग्रह करती है। यह ग्रिड स्थिरता, नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण और घरेलू, औद्योगिक एवं उपयोगिता स्तर पर बैकअप बिजली के लिए अहम है।

रिलायंस ने गुजरात के जामनगर में सौर मूल्य श्रृंखला, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और इलेक्ट्रोलाइज़र के लिए एकीकृत विनिर्माण परिवेश बनाने के लिए 75,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।

कंपनी का कहना है कि धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा फैक्ट्री में स्थित यह संयंत्र एक ही स्थल पर दुनिया का सबसे बड़ा, आधुनिक, मॉड्यूलर और एकीकृत विनिर्माण परिवेश होगा।

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जामनगर में 30 गीगावाट-घंटा की वार्षिक क्षमता वाली एकीकृत उन्नत रासायनिक बैटरी विनिर्माण इकाई का निर्माण भी शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, वह सोडियम-आयन बैटरी प्रौद्योगिकी को भी आगे बढ़ा रही है जो स्थिर भंडारण और दोपहिया वाहनों की बैटरियों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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