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Tuesday, 24 February, 2026
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एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने किसी भी प्रकार की अनियमितता से किया इनकार

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नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने कथित तौर पर धोखाधड़ी से खाते खोलने के मामले में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार किया है। हरियाणा सरकार के सरकारी कारोबार करने से प्रतिबंधित किए जाने के बाद बैंक ने यह बात कही।

हरियाणा सरकार ने कथित धोखाधड़ी के आरोपों के मद्देनजर एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के साथ-साथ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक को भी सरकारी कार्यों के लिए अपनी समिति से बाहर (डी-एम्पैनल्ड) कर दिया है।

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने कहा कि संबंधित खाते सभी आवश्यक ‘केवाईसी’ जांच और प्राधिकरण प्रक्रिया पूरी करने के बाद खोले गए थे।

हरियाणा सरकार के वित्त विभाग द्वारा जारी परिपत्र में कहा गया, ‘‘ आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को हरियाणा में सरकारी कामकाज से तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक समिति से बाहर किया जाता है। ’’

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को खुलासा किया था कि उसके कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा हरियाणा सरकार के खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने रविवार देर शाम शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि संबंधित सरकारी खाता एक बड़े निजी क्षेत्र के बैंक से 25 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि स्थानांतरित होने के बाद खोला गया था। बाद में एक अन्य निजी क्षेत्र के बैंक (आईडीएफसी फर्स्ट बैंक) से कई लेनदेन के जरिये 47 करोड़ रुपये और प्राप्त हुए।

बैंक के अनुसार, सरकारी खाते में प्राप्त कुल 47 करोड़ रुपये 14 लेनदेन के माध्यम से ग्राहक खाते में स्थानांतरित किए गए।

बैंक के प्रारंभिक निष्कर्षों के मुताबिक, ये सभी 14 लेनदेन संबंधित हरियाणा सरकारी विभाग द्वारा शुरू किए गए थे और उन्हें विधिवत अधिकृत कर विभाग के निर्देशों के अनुरूप सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत निष्पादित किया गया।

बैंक ने कहा कि उसके पास पूर्ण ‘ऑडिट ट्रेल’ उपलब्ध है और खाता खोलने के प्रपत्र, केवाईसी दस्तावेज, चेक और अन्य लेनदेन निर्देश, सत्यापन कॉल विवरण सहित सभी अभिलेख संबंधित सरकारी विभाग को उपलब्ध करा दिए गए हैं।

यह खाता 15 जनवरी 2026 को विभाग के निर्देशानुसार बंद कर दिया गया और 25 करोड़ रुपये की शेष राशि, ब्याज सहित, मूल बड़े निजी क्षेत्र के बैंक को वापस स्थानांतरित कर दी गई।

बैंक ने कहा, ‘‘ उपलब्ध तथ्यों और प्रारंभिक समीक्षा के आधार पर इस चरण में बैंक पर किसी वित्तीय प्रभाव या धोखाधड़ी संबंधी गतिविधि का कोई संकेत नहीं है।’’

शेयर बाजार को दी सूचना में कहा गया कि बैंक के निदेशक मंडल को सूचित कर दिया गया है और निष्पक्ष एवं पारदर्शी समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए आंतरिक जांच जारी है। कुछ कर्मचारियों को ‘ड्यूटी’ से हटाया गया है।

बैंक के पास 17 फरवरी 2026 तक हरियाणा सरकार से पास कुल 735 करोड़ रुपये की जमा राशि थी जो 21 फरवरी 2026 तक यह राशि घटकर 538 करोड़ रुपये रह गई।

बैंक ने कहा कि वह पारदर्शिता और सार्वजनिक धन की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है तथा पुनः समिति में शामिल होने के लिए हरियाणा सरकार और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत जारी है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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