नयी दिल्ली, सात नवंबर (भाषा) जनरेटिव यानी सृजन से जुड़ा कृत्रिम मेधा (एआई), रोबोटिक्स और उपग्रह आधारित सुदूर संवेदन सहित सात उभरती हुई महत्वपुर्ण प्रौद्योगिकियां कृषि में बड़े बदलाव लाने के लिए तैयार हैं।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने भारत में हुए एक अध्ययन का हवाला देते हुए शुक्रवार को यह बात कही।
मंच ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि इन तकनीकों में कंप्यूटर विजन, एज इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), सीआरआईएसपीआर (क्लस्टर्ड रेगुलर इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिंड्रोमिक रिपीट्स) और नैनो टेक्नोलॉजी शामिल हैं। इनकी मदद से ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित करते हुए मजबूती और उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा।
‘कृषि में गहन तकनीक क्रांति की तैयारी’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट उद्योग और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के सहयोग से तैयार की गई है।
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब वैश्विक स्तर पर कृषि संकटों के दौर से गुजर रही है। गांवों से शहरों की ओर बढ़ता पलायन, जलवायु परिवर्तन की तीव्रता और मिट्टी तथा पानी सहित प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से क्षरण के कारण उत्पादकता पर दबाव है।
डब्ल्यूईएफ ने कहा कि इन सात तकनीकी क्षेत्रों में खेती, निगरानी, सुरक्षा और वितरण के तरीके में मूलभूत बदलाव लाने की क्षमता है, जिसके चलते पूरे कृषि क्षेत्र में उत्पादकता, स्थिरता और लचीलेपन में सुधार होगा।
यह रिपोर्ट डब्ल्यूईएफ की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर एग्रीकल्चर इनिशिएटिव (एआई फॉर एआई) ने जारी की। भारत के अनुभव के आधार पर ‘एआई फॉर एआई’ ने सऊदी अरब, कोलंबिया और ब्राजील में भी इसी तरह की पहल का समर्थन किया है।
डब्ल्यूईएफ ने रिपोर्ट में भारत की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के तहत फसल मूल्यांकन के लिए सुदूर संवेदन का उल्लेख भी किया गया है।
भाषा पाण्डेय रमण
रमण
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
