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Thursday, 19 March, 2026
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दवा, चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवाचार एवं शोध योजना के लिए आवेदन आमंत्रित

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नयी दिल्ली, दो अक्टूबर (भाषा) सरकार ने दवा एवं चिकित्सा-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए अपनी पीआरआईपी योजना के तहत चलाई जाने वाली परियोजनाओं के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं।

‘दवा एवं चिकित्सा-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में शोध एवं नवाचार का प्रोत्साहन’ (पीआरआईपी) योजना का उद्देश्य इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और नवाचार-केंद्रित बनाना है।

रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपये का स्वीकृत आवंटन किया गया है और यह लगभग 300 परियोजनाओं के माध्यम से दवा एवं चिकित्सा-प्रौद्योगिकी (मेडटेक) नवाचार को आगे बढ़ाएगी।

योजना में ‘रणनीतिक प्राथमिकता नवाचार’ (एसपीआई) क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है जिनमें विशेष दुर्लभ बीमारियां, एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध, टीका-रोकने योग्य बीमारियां, उष्ण-कटिबंधीय कीटजनित रोग और महामारी-उत्प्रेरक रोगजनक शामिल हैं।

इस योजना के तहत कुल शोध एवं विकास निवेश लगभग 11,000 करोड़ रुपये होगा जिसमें नई दवाएं, जटिल जेनेरिक, बायोसिमिलर और नवीन चिकित्सा उपकरण शामिल हैं।

औषधि विभाग ने योजना में संशोधन करते हुए संपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं, ताकि सभी हितधारकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसका प्रभाव बढ़ाया जा सके।

संशोधित योजना के तहत प्रारंभिक चरण की परियोजनाओं के लिए, एमएसएमई और स्टार्टअप कंपनी ऐसी परियोजनाओं के लिए आवेदन कर सकती हैं जिनकी लागत नौ करोड़ रुपये तक हो और उन्हें अधिकतम पांच करोड़ रुपये तक सहायता दी जा सके।

वहीं, अंतिम चरण की परियोजनाओं के लिए, जिनकी लागत 285 करोड़ रुपये तक हो, एमएसएमई और स्टार्टअप अधिकतम 100 करोड़ रुपये तक सहायता ले सकते हैं।

इसके अलावा, संशोधित योजना में उद्योग, एमएसएमई और स्टार्टअप को राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक एवं शोध संस्थाओं के साथ सहयोग करने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए गए हैं।

इस योजना के तहत एक अक्टूबर से विशेष पोर्टल के जरिये आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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