नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार को कहा कि विशिष्ट पहचान प्रौद्योगिकी, डिजिटल भुगतान एवं को-विन जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी समाधानों को अपनाने से दूसरे देशों को अरबों डॉलर बचाने के साथ ही अपनी डिजिटलीकरण प्रक्रिया तेज करने में मदद मिलेगी।
चंद्रशेखर ने बुधवार को आयोजित होने वाले पहले ‘इंडिया स्टैक डेवलपर कांफ्रेंस’ का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार भारतीय प्रौद्योगिकी समाधानों की पेशकश के लिए कोई भी शुल्क नहीं लेगी लेकिन इससे देश की स्टार्टअप एवं सिस्टम कंपनियों को स्वदेशी स्तर पर विकसित प्रौद्योगिकी मंच पेश करने का मौका मिलेगा।
सरकार दूसरे देशों को भी अपनी कारगर प्रौद्योगिकी देने की योजना बना रही है। भारत के जी-20 अध्यक्ष बनने के बाद सरकार इसे अपनी जिम्मेदारी के रूप में ले रही है। इसके अलावा इस पहल से भारतीय स्टार्टअप को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है।
चंद्रशेखर ने कहा, ‘पहला डेवलपर्स कांफ्रेंस कल होने वाला है। यह एक वार्षिक आयोजन होगा जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी मंचों के कर्ताधर्ता इकट्ठा होंगे। स्टार्टअप एवं सिस्टम कंपनियों के प्रतिनिधि विदेशी सरकारों के अलावा राज्य सरकारों के अधिकारियों से मिलेंगे। इस दौरान भारतीय प्रौद्योगिकी समाधानों को व्यापक स्तर पर अपनाने पर जोर दिया जाएगा।’
सरकार को उम्मीद है कि इस सम्मेलन में उद्योग, सरकार, स्टार्टअप एवं शैक्षणिक जगत के 100 से अधिक दिग्गज शामिल होंगे। इसके अलावा जी-20 देशों और जी-20 सचिवालय के प्रतिनिधियों को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत छोटे आकार एवं कम प्रौद्योगिकी क्षमता वाले देशों की मदद करना चाहता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले महीने अबू धाबी में होने वाले विश्व सरकार सम्मेलन में कई देशों के साथ भारतीय प्रौद्योगिकी सहयोग पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि यह सिलसिला साल के बाकी समय भी जारी रहेगा और यह लाभ अफ्रीका के अलावा एशिया एवं यूरोप के कई देशों को भी मिल सकता है। भारत पहले ही यूपीआई और रुपे कार्ड के बारे में अन्य देशों को सहयोग कर रहा है।
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