कोलकाता, 14 जनवरी (भाषा) कम आमदनी वाले परिवारों के लिए एक वित्तीय समर्थन प्रणाली के तौर पर काम कर चुके सूक्ष्म-वित्त संस्थान (एमएफआई) देश की वृद्धि की प्रक्रिया में एक अग्रणी भूमिका निभाएंगे। एक अध्ययन रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2017 से जून 2022 के बीच एमएफआई क्षेत्र में कई बदलाव आए। इनकी वजह से सूक्ष्म-वित्त संस्थानों का विस्तार हुआ और उन्होंने करोड़ों परिवारों को छोटे-छोटे कर्ज मुहैया कराए।
यह रिपोर्ट सलाहकार फर्म प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) और भारतीय सूक्ष्म-वित्त संस्थान संघ के एक संयुक्त अध्ययन का नतीजा है। इसके मुताबिक, एमएफआई उद्योग का वैश्विक बाजार वर्ष 2026 तक बढ़कर 122.46 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस तरह इसमें सालाना 11.61 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।
वर्ष 2017 के बाद से भारतीय एमएफआई उद्योग ने ऑनलाइन माध्यम का इस्तेमाल कर डिजिटल विस्तार किया। इसमें मोबाइल बैंकिंग और ई-वॉलेट की भी अहम भूमिका रही।
रिपोर्ट कहती है कि इस उद्योग का भविष्य इस बात से तय होगा कि वह नई भागीदारी करने और नए उत्पादों के विकास के साथ ही निवेश चैनल के तौर पर खुद को किस तरह ढालता है। इस दौरान उसे छोटे किसानों, वेंडरों एवं श्रमिकों का भी ध्यान रखना होगा।
भाषा प्रेम
प्रेम पाण्डेय
पाण्डेय
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