नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) सिक्किम का पूर्वी जिला भूस्खलन घनत्व और जोखिम के मामले में देश के सभी जिलों में नौवें स्थान पर है। पूर्वी जिले में मंगलवार को हुए हिमस्खलन में कई लोगों की मौत हो गई।
भूस्खलन घनत्व सड़क के प्रति एक किलोमीटर हिस्से में भूस्खलन की संख्या दर्शाता है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय सुदूर संवेदी केंद्र (एनआरएससी) द्वारा जारी ‘लैंडस्लाइड एटलस ऑफ इंडिया’ के अनुसार, सिक्किम में 2011 और 2017 के बीच 1,561 भूस्खलन हुए, जिनमें से अधिकांश भूकंप या भारी वर्षा से उत्पन्न घटना-आधारित भूस्खलन की श्रेणी में आते हैं।
सिक्किम का दक्षिण जिला देशभर में भूस्खलन घनत्व और जोखिम के मामले में आठवें स्थान पर है।
‘लैंडस्लाइड एटलस ऑफ इंडिया’ में कहा गया है, ‘‘पर्वतीय स्थलाकृति और भारी वर्षा के कारण हिमालय और पश्चिमी घाट बड़े पैमाने पर भूस्खलन के प्रति अतिसंवेदनशील हैं।’’
ये निष्कर्ष एनआरएससी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए नवीनतम जोखिम मूल्यांकन से सामने आए। एनआरएससी ने सूची को भारत के भूस्खलन एटलस के हिस्से के रूप में प्रकाशित किया। टीम ने 17 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में 147 सबसे अधिक भूस्खलन-संवेदनशील जिलों की सूची जारी की।
मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पूर्वी जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में शुक्रवार से बारिश और बर्फबारी हो रही है। उन्होंने कहा कि मौसम कार्यालय ने पूर्वोत्तर राज्य में बारिश, गरज चमक के साथ बूंदाबांदी का पूर्वानुमान जताया था।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के गंगटोक कार्यालय ने बताया कि पूर्वी जिले में स्थित गंगटोक के मौसम केंद्र ने मंगलवार सुबह साढ़े आठ बजे समाप्त हुए 24 घंटे में 50 मिलीमीटर बारिश दर्ज की।
अधिकारियों ने कहा कि सिक्किम के नाथू ला इलाके में मंगलवार सुबह भारी हिमस्खलन की चपेट में आने से सात पर्यटकों की मौत हो गई।
भाषा अमित पवनेश
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