भद्रवाह/जम्मू, 19 अगस्त (भाषा) सर्दी का मौसम नजदीक आने के साथ ही जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में विजय कुमार का परिवार भूकंप से क्षतिग्रस्त अपने मिट्टी के घर के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र की प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत मिलने वाली सहायता का इंतजार कर रहा है।
भद्रवाह घाटी में आठ अगस्त को आए भूकंप के कारण कुरसारी पंचायत के सुदूरवर्ती लामोटे गांव में यह घर ढह गया, जिसके बाद से कुमार की सात महीने की गर्भवती पत्नी निशु देवी (29) और उनके दो दिव्यांग रिश्तेदार लगभग खुले असमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
कुमार एक चालक के रूप में काम करते हैं और आजीविका की तलाश में अधिकतर अपने गृहनगर से बाहर रहते हैं।
क्षतिग्रस्त घर के एक हिस्से में रहने वाली निशु देवी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमने दो साल पहले पक्का घर बनाने के वास्ते प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया था। वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद हमारे दरख्वास्त पर अब तक गौर नहीं किया गया है।’’
उन्होंने पीएमएवाई के तहत समय से सहायता नहीं मिलने और अपनी दुर्दशा के लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनका परिवार आने वाली सर्दियों को देखते हुए अपनी सुरक्षा को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं।
निशु देवी ने कहा, ‘‘मैं आने वाले महीनों में दो दिव्यांग सदस्यों और अपने पहले बच्चे के साथ स्थिति का सामना कैसे करूंगी, खासकर भीषण सर्दियों की परिस्थितियों के बारे में सोचकर मैं बहुत परेशान हूं। मैं सरकार से अपील करना चाहती हूं कि वह इस स्थिति से उबरने में मेरी मदद करें।’’
उन्होंने दावा किया कि परिवार के लिए पक्की छत का इंतजाम करने के उनके सभी प्रयास व्यर्थ चले गए क्योंकि पंचायती राज संस्थान (पीआरआई) के सदस्यों से लेकर राजनीतिक प्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों तक सभी दरवाजे खटखटाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।
देवी ने कहा, ‘‘अगर मेरे परिवार के किसी भी सदस्य के साथ कुछ अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।’’
भद्रवाह के अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) दिलमीर चौधरी ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 के लिए भद्रवाह ब्लॉक की 30 पंचायतों में 1,523 लाभार्थियों के लक्ष्य के मुकाबले, पीएमएवाई के तहत 1,118 मामलों पर विचार किया गया, लेकिन इनमें से 209 फर्जी पाए गए और बाद में ये मामले खारिज कर दिए गए।
कई लाभार्थियों ने यह भी दावा किया कि उन्हें पीएमएवाई के तहत राशि की पहली किस्त तो मिल गई है, लेकिन दूसरी किस्त लंबित है।
सुषमा देवी (43) और उनके छोटे भाई नरेश कुमार (35), उस समय बाल-बाल बच गए, जब भूकंप से उनका घर ढह गया। दोनों लोग दिव्यांग हैं।
कुमार ने कहा, ‘‘जब भूकंप आया, मैं सो रहा था और अचानक दीवार और छत से मिट्टी मेरे ऊपर गिर गई। मैं भाग नहीं सका और सोचा कि हम मलबे के नीचे दब जाएंगे लेकिन निशु देवी ने मुझे घर से बाहर खींच लिया। हम बाल-बाल बच गए क्योंकि कुछ ही मिनटों में हमारा घर ढह गया।’’
कुमार ने उम्मीद जताई कि अधिकारियों को परिवार पर थोड़ी दया आएगी और उनके पक्ष में योजना को मंजूरी दी जाएगी।
भाषा शफीक राजकुमार
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