नयी दिल्ली, 14 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष सोमवार को एक जनहित याचिका सुनवाई के लिए आई जिसमें पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश केवल साझा विधि प्रवेश परीक्षा (क्लैट-यूजी) 2023 के आधार पर देने के दिल्ली विश्वविद्यालय के फैसले को चुनौती दी गई।
दिल्ली विश्वविद्यालय के वकील द्वारा याचिका पर जवाब देने के लिए समय मांगे जाने के बाद मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने इस पर अगली सुनवायी की तिथि 17 अगस्त तय की।
याचिका में अनुरोध किया गया है कि पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रमों में प्रवेश शिक्षा मंत्रालय (एमओई) द्वारा शुरू की गई विश्वविद्यालयीन सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी)-स्नातक 2023 के माध्यम से की जाए।
इसमें कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2023-24 के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सभी स्नातक कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा सीयूईटी-स्नातक 2023 की शुरुआत की गई थी।
दिल्ली विश्वविद्यालय के परिसर लॉ सेंटर में कानून के छात्र एवं याचिकाकर्ता प्रिंस सिंह ने दावा किया कि विश्वविद्यालय ने उक्त अधिसूचना जारी करते समय ‘पूरी तरह से अनुचित और मनमानी शर्त’ लगाई है कि पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रमों में प्रवेश पूरी तरह से क्लैट-यूजी 2023 परिणाम की मेरिट के आधार पर होगा, जो संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार और अनुच्छेद 21 के तहत शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।
भाषा अमित माधव
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