नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने गुरुवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी कैबिनेट के पूर्व सदस्य इंद्रनील सेन की म्यूजिक कंपनी के बीच सीधा आर्थिक संबंध था. एजेंसी ने एक बयान में कहा कि सेन के म्यूजिक लेबल ऑक्टेव रिकॉर्ड्स और तृणमूल कांग्रेस नेता के बैंक खाते के बीच करीब 30 लाख रुपये का लेनदेन हुआ था.
हालांकि, एजेंसी के सूत्रों ने इस लेनदेन को अपराध से हुई कमाई यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम का ट्रांसफर कहने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि इस लेनदेन की “प्रकृति और किस्म” अभी पता की जानी बाकी है.
एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा, “जांच में पता चला है कि इंद्रनील सेन और उनके मालिकाना कारोबार M/S ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खातों में उनके कार्यकाल के दौरान 3.8 करोड़ रुपये से ज्यादा नकद जमा किए गए. इसके अलावा, ऑक्टेव रिकॉर्ड्स के बैंक खाते से बैंकिंग चैनल के जरिए करीब 30 लाख रुपये ममता बनर्जी को ट्रांसफर किए गए, जो उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री थीं. इंद्रनील सेन ने दावा किया है कि यह रकम रॉयल्टी के तौर पर दी गई थी.”
एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि पूछताछ के दौरान सेन ने बताया कि यह पैसा बनर्जी को रॉयल्टी के तौर पर दिया गया था. उन्होंने कहा कि बनर्जी ने जो गाने और धुनें बनाई थीं, उन्हें सेन के म्यूजिक लेबल के जरिए बेचा गया था. हालांकि, एजेंसी के मुताबिक सेन अपने दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत नहीं दे सके.
एजेंसी के एक अधिकारी ने कहा, “करीब आधा दर्जन लेनदेन में करीब 30 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे. उनसे पूछा गया कि इस पैसे को ट्रांसफर करने का आधार और वजह क्या थी. उन्होंने कहा कि यह उन गानों और धुनों के लिए उन्हें भुगतान था, जिन्हें ममता बनर्जी ने बनाया था और बाद में उनकी कंपनी के जरिए बेचा गया.”
अधिकारी ने आगे बताया, “लेकिन वह ऐसी किसी व्यवस्था को साबित करने वाला कोई समझौता या उन गानों और धुनों की बिक्री का कोई सबूत नहीं दे सके, जिससे पैसा मिला हो. लेनदेन होना साबित हो चुका है, लेकिन इस पैसे के ट्रांसफर की प्रकृति और किस्म अभी तय नहीं हुई है. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह पैसा अपराध से हुई कमाई का हिस्सा था या नहीं.”
तृणमूल के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले ने ED के दावों को खारिज कर दिया. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “ED के राजनेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों में करीब 98 प्रतिशत मामले विपक्षी नेताओं के खिलाफ हैं. बाकी वे मामले हैं जिनमें लोग BJP की ‘वॉशिंग मशीन’ में जाकर शामिल हो गए.”
उन्होंने कहा, “पिछले 11 साल में ED ने कुल 5,297 मामले दर्ज किए. इनमें से कितने मामलों को सुनवाई के लिए अदालत तक ले जाया गया. सिर्फ 47.”
गोखले ने विस्तार से कहा, “ED की सजा दिलाने की दर 0.7 प्रतिशत है. इसका मतलब है कि हर 1,000 मामलों में सिर्फ सात मामलों में आरोपी दोषी पाए गए. इसलिए ED द्वारा दर्ज हर 100 मामलों में से सिर्फ एक मामला वास्तव में अदालत तक पहुंचता है. और 1,000 लोगों को जेल भेजे जाने पर सिर्फ सात दोषी पाए जाते हैं.”
एजेंसी ने सेन के ठिकानों पर तलाशी पूरी होने के बाद यह बयान जारी किया. सेन, बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में पर्यटन मंत्री थे. यह तलाशी भक्तों से जमा किए गए पैसों के निजी इस्तेमाल के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किए जाने की जांच के तहत की गई थी.
एजेंसी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच कोलकाता पुलिस की ओर से दर्ज एक FIR पर आधारित है. FIR में आरोप लगाया गया था कि सेन, उनकी पत्नी मधुचंदा सेन, महानिरबन रोड मास आर्ट सोसाइटी यानी MassArt के अध्यक्ष और इस सांस्कृतिक संस्था के दूसरे पदाधिकारियों ने 2022 से 2025 के बीच जनता से बड़ी रकम जमा की.
आरोप है कि उन्होंने झूठा दावा किया कि वे UNESCO द्वारा प्रायोजित संस्था हैं. इसके बाद इन पैसों का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया गया.
एजेंसी ने आरोप लगाया कि MassArt ने दुर्गा पूजा देखने की व्यवस्था को “व्यवस्थित तरीके से व्यावसायिक बना दिया”. यानी एक सार्वजनिक त्योहार को कारोबारी गतिविधि में बदल दिया गया. कोलकाता के 24 चुने हुए दुर्गा पूजा पंडालों में आम लोगों को प्रीव्यू शो के टिकट 1,749 रुपये से लेकर 5,499 रुपये तक में बेचे गए.
एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा, “इस धोखाधड़ी वाली योजना का एक मुख्य हिस्सा था कि MassArt ने व्यावसायिक फायदे के लिए UNESCO के आधिकारिक नाम, उसकी प्रतिष्ठा और उसके लोगो का धोखे से और बिना अनुमति के इस्तेमाल किया.”
प्रवक्ता ने कहा, “जांच में पता चला है कि सिर्फ 2023 और 2024 के दो साल में ही ऐसे एक लाख से ज्यादा टिकट जारी किए गए. इसके बाद टिकटों की बिक्री से मिली रकम को या तो बैंक खातों से नकद निकालकर हटा दिया गया या अलग-अलग खर्चों के नाम पर उसे खर्च दिखाकर खत्म कर दिया गया.”
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