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Friday, 2 October, 2026
होमहेल्थNMR में अब तक 1.66 लाख डॉक्टर, जबकि देश में 13.88 लाख रजिस्टर्ड—NMC का क्या है नया प्लान?

NMR में अब तक 1.66 लाख डॉक्टर, जबकि देश में 13.88 लाख रजिस्टर्ड—NMC का क्या है नया प्लान?

नेशनल मेडिकल कमीशन के एक अधिकारी का कहना है कि अगले साल तक रजिस्ट्रेशन का लगभग 80% काम पूरा हो जाएगा, जबकि जिन मामलों में सवाल या गड़बड़ियां हैं, उनमें ज़्यादा समय लग सकता है.

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नई दिल्ली: सभी स्टेट मेडिकल काउंसिल यानी SMC के रजिस्टर को एक साथ जोड़कर नेशनल मेडिकल रजिस्टर यानी NMR बनाने वाला एक पूरे भारत के लिए साझा रजिस्ट्रेशन पोर्टल अगले साल की शुरुआत में पूरी तरह काम करने लगेगा और आम लोग इसमें डॉक्टरों की जानकारी खोज सकेंगे. नेशनल मेडिकल कमीशन यानी NMC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को दिप्रिंट को यह जानकारी दी.

यह पोर्टल सभी SMC के मेडिकल रजिस्टर को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ेगा. इससे NMC आसानी से NMR बना और अपडेट कर सकेगा. इसमें भारत में प्रैक्टिस कर रहे सभी रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टरों का एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस होगा.

पोर्टल शुरू होने के बाद आम लोग NMR में डॉक्टर का नाम खोज सकेंगे और उनके रजिस्ट्रेशन की जानकारी की जांच कर सकेंगे. NMR का मकसद मेडिकल डॉक्टरों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाना है. इसमें डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन और योग्यता की जानकारी उनके स्टेट मेडिकल रजिस्टर के रिकॉर्ड से जुड़ी होगी.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक करीब 1.66 लाख डॉक्टर NMR में रजिस्टर हो चुके हैं. यह रजिस्टर अगस्त 2024 में शुरू होने के दो साल से ज्यादा समय बाद का आंकड़ा है.

केंद्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से इस साल मार्च में संसद को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भारत में 13,88,185 रजिस्टर्ड एलोपैथिक डॉक्टर हैं.

वरिष्ठ NMC अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया, “हमें उम्मीद है कि अगले साल तक रजिस्ट्रेशन का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो जाएगा. हालांकि, जिन मामलों में सवाल या जानकारी में गड़बड़ी होगी, उनमें ज्यादा समय लग सकता है.”

नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट 2019 के तहत NMC के एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड को राष्ट्रीय रजिस्टर संभालना होता है. वहीं, स्टेट मेडिकल काउंसिल अपने-अपने रजिस्टर को संभालती और अपडेट करती हैं और उनकी जानकारी राष्ट्रीय डेटाबेस के साथ साझा करती हैं.

इसका मकसद डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन और उसकी योग्यता की जांच को आसान बनाना है. आगे चलकर डॉक्टरों को एक राज्य से दूसरे राज्य में काम करने के लिए अलग-अलग राज्यों में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत भी नहीं होगी.

हालांकि, इसे लागू करने की प्रक्रिया धीमी रही है. अधिकारी ने कहा, “इसी के अनुसार हमने एक डिजिटल समाधान और मजबूत लिंक तैयार करने की योजना बनाई है.”

NMC ने पहले कहा था कि एक साझा पोर्टल के जरिए रजिस्ट्रेशन आसान किया जाएगा. नए मेडिकल ग्रेजुएट को उनके स्टेट मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के बाद आगे चलकर अपने आप NMR पहचान नंबर मिल जाएगा. हालांकि, जो डॉक्टर पहले से प्रैक्टिस कर रहे हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी.

ऊपर जिक्र किए गए अधिकारी ने यह भी साफ किया कि NMR रजिस्ट्रेशन के लिए कोई अलग फीस नहीं है. यह भ्रम 2026 के ड्राफ्ट रजिस्ट्रेशन ऑफ मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एंड लाइसेंस टू प्रैक्टिस मेडिसिन अमेंडमेंट रेगुलेशन के बाद पैदा हुआ था. इस ड्राफ्ट में प्रस्ताव दिया गया था कि स्टेट मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस करने के लाइसेंस के लिए फीस ले सकती हैं.

ड्राफ्ट में कहा गया था, “संबंधित स्टेट मेडिकल काउंसिल खुद को संतुष्ट करने के बाद रजिस्ट्रेशन और मेडिकल प्रैक्टिस का लाइसेंस देने के आवेदन पर विचार करेगी और उचित फीस लेने के बाद 30 दिनों के अंदर प्रक्रिया पूरी करेगी.”

अधिकारी ने साफ किया कि शुरुआती रजिस्ट्रेशन हमेशा संबंधित SMC के स्तर पर ही होता है और SMC अपने राज्य के कानून और नियमों के अनुसार फीस लेती है. लेकिन NMR में रजिस्ट्रेशन अपने आप होगा और इसके लिए कोई फीस नहीं लगेगी.

15 अक्टूबर तक शुरू होने की उम्मीद

NMR को लागू करने में हुई देरी के बारे में अधिकारियों ने कहा कि इसके लिए मजबूत IT व्यवस्था और स्टेट मेडिकल काउंसिल के साथ बेहतर तालमेल की जरूरत थी.

अधिकारी ने कहा, “इसके लिए हमें बहुत मजबूत इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी बैकअप चाहिए. NMC ने नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन यानी NeGD और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY के साथ मिलकर पूरे NMR सिस्टम को बेहतर बनाने का काम शुरू किया है.”

फिलहाल, जो डॉक्टर किसी स्टेट मेडिकल काउंसिल में रजिस्टर्ड हैं, उन्हें NMR में अलग से रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है. उनका रजिस्ट्रेशन और योग्यता से जुड़ा रिकॉर्ड पहले से संबंधित स्टेट मेडिकल काउंसिल के पास होता है, लेकिन इन रिकॉर्ड को NMR में शामिल करना पड़ता है.

अधिकारी ने कहा कि NMC अब इस प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश कर रहा है. एक यूनिफाइड पैन इंडिया रजिस्ट्रेशन पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जो स्टेट मेडिकल रजिस्टर और NMR को एक साथ जोड़ेगा और दोनों में जानकारी को रियल टाइम में एक जैसा रखेगा.

प्रस्तावित सिस्टम के तहत, जब कोई डॉक्टर किसी स्टेट मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराएगा, तो उसका नाम अपने आप NMR में भी शामिल हो जाएगा. इसका मकसद डॉक्टरों को अलग से राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन नंबर के लिए आवेदन करने की जरूरत कम करना है. इससे डॉक्टरों की मौजूदा व्यवस्था को लेकर उठाई गई एक बड़ी चिंता भी दूर होगी.

डॉक्टरों का कहना था कि उनके रजिस्ट्रेशन और योग्यता की जानकारी पहले से ही स्टेट मेडिकल काउंसिल के पास मौजूद है. इसलिए उन्हें दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने के बजाय वही जानकारी NMR में ट्रांसफर कर देनी चाहिए.

वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया कि केवल उन्हीं डॉक्टरों का डेटा अपने आप NMR में लिया जा सकता है, जो पहले से किसी SMC में रजिस्टर्ड हैं और जिनका आधार SMR से जुड़ा हुआ है.

वरिष्ठ अधिकारी ने आगे कहा, “लेकिन जिन मामलों में स्टेट काउंसिल का रजिस्ट्रेशन आधार से लिंक नहीं है, ऐसे डॉक्टरों के लिए राष्ट्रीय पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना और NMR ID के लिए आवेदन करना जरूरी होगा. क्योंकि आधार का सत्यापन राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने का जरूरी और मुख्य हिस्सा है.”

अधिकारी ने बताया कि NMC ने 2023 के अपने नियमों में भी बदलाव शुरू किया है. इसका मकसद कई राज्यों में अलग-अलग रजिस्ट्रेशन की जरूरत खत्म करना और रजिस्टर्ड मेडिकल डॉक्टरों को पूरे भारत में काम करने की सुविधा देना है.

ड्राफ्ट संशोधन अगस्त 2026 में लोगों की राय लेने के लिए जारी किया गया था. उन्होंने कहा कि अंतिम नोटिफिकेशन 30 नवंबर 2026 तक आने की उम्मीद है.

अधिकारी ने कहा कि साझा पोर्टल 15 अक्टूबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है और इसे पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य 31 दिसंबर 2026 रखा गया है.

हालांकि, पोर्टल का शुरू हो जाना यह नहीं मतलब होगा कि NMR उसी समय पूरी तरह तैयार और आम लोगों के लिए खोजने योग्य डेटाबेस बन जाएगा.

अधिकारी ने कहा, “पूरी सुविधा इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी स्टेट मेडिकल रजिस्टर के अपडेट किए गए डेटाबेस को इसमें जोड़ा जाए. हम सभी स्टेट मेडिकल काउंसिल के साथ इस काम को लगातार और गंभीरता से आगे बढ़ा रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “NMR बनाने का मुख्य उद्देश्य आखिरकार यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय मेडिकल रजिस्टर में अपने डेटा की जांच कर सके.”

उन्होंने कहा कि NMR को पूरी तरह तैयार और आम लोगों के लिए खोजने योग्य डेटाबेस बनाने में अभी और समय लगेगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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