scorecardresearch
Tuesday, 18 June, 2024
होमदेश'वारिस पंजाब दे' के खिलाफ कार्रवाई से ऑपरेशन ब्लूस्टार की बरसी पर गोल्डन टेंपल में जुटे कम लोग- एजेंसी

‘वारिस पंजाब दे’ के खिलाफ कार्रवाई से ऑपरेशन ब्लूस्टार की बरसी पर गोल्डन टेंपल में जुटे कम लोग- एजेंसी

6 जून को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लूस्टार की 39वीं बरसी मनाई गई. अलगाववादी तत्वों के किसी भी नापाक मंसूबे से बचने के लिए शहर भर में भारी पुलिस बल देखा गया.

Text Size:

नई दिल्ली: अमृतसर के गोल्डन टेंपल में ऑपरेशन ब्लूस्टार की वर्षगांठ पर, पंजाब में पूरे साल इस दिन सबसे ज्यादा टिकट बिकती है, इस बार परिस्थित नियंत्रण में रही. खुफिया एजेंसियों का मानना ​​है कि लोगों की उपस्थिति में गिरावट करीबी निगरानी और इस साल की शुरुआत में कट्टरपंथी समूह ‘वारिस पंजाब डे’ पर कार्रवाई के प्रभाव के कारण थी.

6 जून को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लूस्टार की 39वीं बरसी मनाई गई. अलगाववादी तत्वों के किसी भी नापाक मंसूबे से बचने के लिए शहर भर में भारी पुलिस बल देखा गया. स्वर्ण मंदिर परिसर की चारदीवारी के भीतर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी और खुफिया एजेंसियों के जासूस तैनात किए गए थे.

केंद्रीय खुफिया एजेंसियों द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में बताया गया कि अकाल तख्त में मुख्य शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) कार्यक्रम में लोगों की मौजूदगी कम रही. इसमें पहले के वर्षों की तुलना में लगभग 2000 लोगों ने ही भाग लिया था जब 3000 से अधिक लोग शामिल होते थे.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कम उपस्थिति के लिए आंशिक रूप से ‘वारिस पंजाब दे’ (डब्ल्यूपीडी) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिसके कारण युवा पुलिस द्वारा कार्रवाई के डर से कार्यक्रम से दूर रहे.

अकाल तख्त के मुख्य कार्यक्रम में एसजीपीसी द्वारा पर्याप्त संख्या में टास्क फोर्स को अकाल तख्त के चारों ओर एक प्रकार की बैरिकेडिंग बनाकर तैनात किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप बेहतर व्यवस्था हुई. मुख्य कट्टरपंथी नेताओं को एसजीपीसी और पुलिस ने अपने कार्यक्रमों को मौन रखने और अकाल तख्त के एक तरफ प्रतिबंधित स्थान पर आयोजित करने के लिए लगाया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि सिख कट्टरपंथियों के बीच युवाओं द्वारा गुंडागर्दी कम देखी गई.

1 जून को, सिख कट्टरपंथी संगठन दल खालसा ने ऑपरेशन ब्लूस्टार की 39 वीं वर्षगांठ पर अमृतसर बंद का आह्वान किया. कट्टरपंथियों का कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहा क्योंकि अन्य विरोधी संगठनों द्वारा कोई उकसावे की कार्रवाई नहीं हुई. दल खालसा के कार्यक्रम के साथ-साथ एसजीपीसी के मुख्य कार्यक्रम में तलवारों के खुले प्रदर्शन का कोई प्रयास नहीं देखा गया.

फोकस समूह की बैठक और राज्य बहु-एजेंसी केंद्र (एसएमएसी), जो अन्य राज्यों और खुफिया ब्यूरो के साथ संपर्क करता है, ने पिछले अनुभवों और घटनाओं के बारे में पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ जिला स्तर को संवेदनशील बनाने में मदद की. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके परिणामस्वरूप गुंडागर्दी पर अंकुश लगा और पिछले सालों की तुलना में बेहतर परिस्थित प्रदान की गई.


यह भी पढ़ेंः गुस्से में था इसलिए बृज भूषण के खिलाफ पहली बार दिया था गलत स्टेटमेंट – नाबालिग पहलवान के पिता का बयान


share & View comments