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Friday, 3 April, 2026
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समाज पर धब्बा हैं दहेज से जुड़ी मौत की घटनाएं: न्यायालय

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नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) दहेज के मामलों में महिलाओं की मौत की घटनाओं को समाज पर गहरा धब्बा बताते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि कानूनी रोक के बावजूद, इस प्रथा के कारण हजारों महिलाएं बेमौत मारी जाती हैं।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने दहेज से जुड़ी एक मौत के मामले में एक व्यक्ति की जमानत रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय का आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश बिल्कुल टिकाऊ नहीं है।

पीठ ने कहा कि दहेज से जुड़ी मौत जैसे बेहद गंभीर अपराध में, उच्च न्यायालय को अपने विवेक का इस्तेमाल करते समय बहुत ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए थी।

उसने कहा, ‘‘दहेज से जुड़ी मौत के मामले वास्तव में एक गहरी शर्मिंदगी और एक बड़ी सामाजिक बुराई हैं, जो मानवाधिकारों और गरिमा का गंभीर उल्लंघन करते हैं। कानूनी रोक के बावजूद, इस प्रथा के कारण हजारों महिलाएं बेमौत मारी जाती है; अक्सर या तो उनकी हत्या कर दी जाती है, या फिर दूल्हे के परिवार की तरफ से पैसे या कीमती चीजों की लालच भरी मांगों के कारण उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया जाता है। दहेज से जुड़ी मौतें समाज पर गहरा धब्बा हैं।’’

आरोपी की तरफ से पेश वकील ने दलील दी कि यह मामला आत्महत्या का है। वकील के अनुसार, मृतका की मानसिक हालत ठीक नहीं थी और कहा जाता है कि उसने एक इमारत की छठी मंजिल से कूदकर जान दे दी।

उच्चतम न्यायालय ने इस बात पर गौर किया कि पीड़िता की शादी आरोपी से डेढ़ साल पहले हुई थी।

1 सितंबर, 2024 को महिला अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थी। उसके शरीर पर अंदरूनी और बाहरी, दोनों तरह की चोटों के निशान थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह सिर में लगी चोट के कारण होने वाला रक्तस्राव और सदमा बताया गया।

भाषा वैभव नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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