नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को छात्रों को सलाह दी कि वे प्रौद्योगिकी को उन्हें गुलाम नहीं बनाने दें और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग मार्गदर्शन और अपने काम में बेहतरी लाने के लिए किया जाना चाहिए, न कि सीखने के विकल्प के रूप में।
प्रधानमंत्री के वार्षिक ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के नौवें संस्करण की दूसरी कड़ी में, मोदी ने कहा कि मोबाइल फोन उन कुछ बच्चों के मालिक बन गए हैं, जो उनके या टेलीविजन स्क्रीन के बिना खाना भी नहीं खा सकते।
उन्होंने कोयंबटूर, रायपुर, गुवाहाटी और गुजरात के विद्यार्थियों से हुई बातचीत में कहा, ‘‘हर युग में नयी प्रौद्योगिकियों, चाहे कंप्यूटर हों या मोबाइल फोन, को लेकर चिंताएं रही हैं। लेकिन यह डर बेवजह है। आपको यह दृढ़ संकल्प लेना होगा कि हम प्रौद्योगिकी के गुलाम नहीं बनेंगे।’’
प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे एआई जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों से न डरें, बल्कि उनका उपयोग अपने कौशल को निखारने के लिए करें।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें एआई या मोबाइल फोन को अपना मालिक नहीं बनने देना चाहिए, कुछ बच्चे स्मार्टफोन देखे बिना खाना नहीं खाते। हमें प्रौद्योगिकी को समझना होगा, खुद का विस्तार करना होगा, उसमें उस प्रौद्योगिकी की ताकत को जोड़ना होगा, जो हमारे कामों में ‘वैल्यू एडिशन’ करें।’’
मोदी ने कहा कि काम का स्वरूप हमेशा बदलता रहेगा, जैसे परिवहन बैलगाड़ियों से हवाई जहाजों में परिवर्तित हुआ, लेकिन जीवन चलता रहा। उन्होंने कहा, ‘‘कितनी ही उत्तम से उत्तम प्रौद्योगिकी क्यों ना आए, हमारे लिए उपयोगी ही होने वाली है, हमें डरने की जरूरत नहीं है।’’
प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों से परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करने और पर्याप्त नींद लेने का भी आग्रह किया।
मोदी ने कहा, ‘‘परीक्षाओं की अच्छी तैयारी करने के बाद आपको कभी तनाव महसूस नहीं होगा। रात में अच्छी नींद लेने से आप दिन भर खुश रहेंगे।’’
उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे अपने बच्चों की तुलना दूसरों से न करें।
उनसे जब पूछा गया कि भावी नेताओं से वह किन गुणों की अपेक्षा रखते हैं, तो प्रधानमंत्री ने कहा कि पहला गुण है निडरता। मोदी ने कहा कि नेतृत्व तब शुरू होता है जब कोई व्यक्ति दूसरों का इंतजार किए बिना कार्य करने का निर्णय लेता है। उन्होंने कूड़ा उठाने का उदाहरण दिया, ताकि दूसरे लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित हों।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लीडर का मतलब चुनाव लड़ना, राजनीतिक पार्टी बनाना, पार्टी में जाना, लच्छेदार भाषण देना नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि अच्छे नेता लोगों का मार्गदर्शन करने से पहले उन्हें समझते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘नेता बनने के लिए, पहल करने की सोच विकसित करें। नेतृत्व का एक प्रमुख गुण कम से कम 10 लोगों को अपने विचार स्पष्ट और प्रभावी ढंग से समझाने की क्षमता है।’’
करियर विकल्पों के बारे में उन्होंने कहा कि लगातार बदलती आकांक्षाएं परिवारों को भ्रमित करती हैं, लेकिन सफल लोगों से प्रेरित होना स्वाभाविक है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दूसरों की केवल उपलब्धियों को ही नहीं देखना चाहिए, बल्कि सफलता के पीछे किए गए प्रयास और अनुशासन को भी देखना चाहिए।
एक छात्र की पढ़ाई और रुचियों के बीच संतुलन बनाने संबंधी चिंता को दूर करने की कोशिश करते हुए, मोदी ने कहा कि दोनों ही उपयोगी हैं और एक दूसरे के पूरक हो सकते हैं।
स्टार्टअप से संबंधित एक अन्य छात्र के प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पहले इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि आप क्या करना चाहते हैं, चाहे वह प्रौद्योगिकी में नवाचार हो या ड्रोन या विद्युत प्रणालियों जैसे व्यावहारिक समाधान।
प्रधानमंत्री ने बच्चों को प्रौद्योगिकी या वित्त में कुशल मित्रों के साथ छोटी टीम बनाने की सलाह दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देखकर उन्हें प्रसन्नता हुई कि देश के 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्र भी विकसित भारत 2047 के सपने को अपने मन में संजोए हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। हमें विकसित देशों की आदतों को अपनाना चाहिए – हमें लाल बत्ती पर इंजन बंद करना चाहिए, भोजन नहीं छोड़ना चाहिए और भोजन की बर्बादी कम करनी चाहिए… अनुशासन हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है…।’’
प्रधानमंत्री ने अपने छात्र जीवन में अपने शिक्षकों की भूमिका और स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम पर उनके जोर दिये जाने को याद किया।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप किसी भी महान व्यक्ति से पूछेंगे, तो वे कहेंगे कि उनकी मां और शिक्षकों ने उनके जीवन को आकार देने में मदद की।’’
‘परीक्षा पे चर्चा’ के नौवें संस्करण की पहली कड़ी पिछले सप्ताह प्रसारित हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी थी कि वे सबकी सलाह सुनें, लेकिन जीवनशैली में बदलाव तभी करें जब वे चाहें। उन्होंने यह भी कहा था कि शिक्षा को बोझ नहीं समझना चाहिए और उन्हें केवल अंकों पर ही नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए।
‘परीक्षा पे चर्चा’ टाउनहॉल प्रारूप में छात्रों के साथ बातचीत के रूप में 2018 में शुरू हुआ और बाद में यह भारत के सबसे बड़े शैक्षिक सहभागिता कार्यक्रमों में से एक बन गया।
वर्ष 2023 में इस कार्यक्रम में लगभग 38.8 लाख छात्रों के पंजीकरण से बढ़कर 2024 में यह आंकड़ा 2.26 करोड़ हो गया और 2025 में 3.53 करोड़ तक पहुंच गया। इस उपलब्धि ने कार्यक्रम को ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में स्थान दिलाया। नौवें संस्करण ने 4.5 करोड़ से अधिक पंजीकरण के साथ पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया।
भाषा सुभाष वैभव
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