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Thursday, 18 July, 2024
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ट्रोल्स से तौबा? महिलाओं और ट्रांसजेंडरों के लिए सुरक्षित वेब के वादे के साथ आ रहा है एक नया प्लेटफॉर्म

जून में लॉन्च होने वाले सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'कोटो' का लक्ष्य एक ऐसा ऑनलाइन स्पेश तैयार करने का है जहां ट्रांसजेंडर समेत तमाम महिलाएं स्वतंत्र रूप से खुद को अभिव्यक्त कर सकें और अपने उद्यमशीलता वाले उपक्रमों के लिए लोगों का ध्यान हासिल कर सकें.

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नई दिल्ली: जून में लॉन्च होने वाले ‘कोटो’ नामक एक सामाजिक समुदाय मंच (सोशल कम्युनिटी प्लेटफार्म), जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए है, का उद्देश्य ऑनलाइन रूप से एक ऐसी जगह (स्पेश) तैयार करना है जो ऑनलाइन ट्रोलिंग और दुर्व्यवहार से मुक्त हो. यह वेब-3 प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया, जहां पुरुषों की संख्या महिलाओं से काफी अधिक है, पर ‘लैंगिक विभेद को कम करने’ का वादा करता है.

‘कमिंग टुगेदर’ शब्दों के शुरुआती दो अक्षरों से अपना नाम प्राप्त करने के साथ ही ‘कोटो’ एक ऐसा मंच होगा, जहां ट्रांसजेंडर (किन्नरों) सहित तमाम महिलाएं स्वतंत्र रूप से खुद को अभिव्यक्त कर सकती हैं और साथ ही अपने उद्यमशीलता वाले उपक्रमों के लिए लोगों का ध्यान खीँच सकती हैं.

इसकी स्थापना वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ज़ी5 की पूर्व प्रोग्रामिंग हेड अपर्णा आचरेकर, ज़ी5 के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तरुण कटियाल और ज़ी5 में ही एक्सपेंशन प्रोजेक्ट्स के पूर्व बिजनेस हेड और प्रोडक्ट्स हेड रजनील कुमार ने की है. वे अपनी कंपनी, ईव वर्ल्ड के माध्यम से इस प्लेटफॉर्म को शुरु करने जा रहे हैं, और उनका पूरा जोर इस बात पर है कि ‘सुरक्षा’ ही ‘कोटो का सबसे मजबूत सिद्धांत’ है.

आचरेकर ने दिप्रिंट को बताया, ‘इंटरनेट को सशक्त और समावेशी बनाने के लिए, एक ऐसा सुरक्षित स्थान होना अनिवार्य है जहां हम स्वतंत्र रूप से खुद को अभिव्यक्त कर सकें. महिलाओं को अंतरंग बातचीत करने का मौका नहीं मिलता है, जो खुद के द्वारा की जाने वाली सेंसरशिप का कारण बनती है.’

इस तरह से एक सुरक्षित ऑनलाइन स्थान तैयार करना एक ऐसे देश में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहां कई सारे भारतीय शहरों में महिलाएं सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा की मांग को लेकर नियमित रूप से विरोध प्रदर्शन करती हैं. ‘व्हाई लोइटर‘ और ‘टेक बैक द नाइट‘ जैसे अभियानों के तहत सैकड़ों महिलाओं को सुरक्षा और जवाबदेही की मांग करते हुए सड़कों पर उतरते देखा गया है.

ऑनलाइन ट्रोलिंग, सेक्सिज्म (लिंग के आधार पर भेद भाव) और मिसोगिनी (स्त्रियों के प्रति द्वेष), तथा ट्रोल्स की बढ़ती फौज जो महिलाओं को धमकी देने से पहली में कुछ नहीं सोचती, काफी हद तक अनियंत्रित रही है और सोशल मीडिया ने ऑफ़लाइन दुनिया में भी हर दिन खुले तौर पर सामने आने वाले सेक्सिज्म को बढ़ावा ही दिया है.

महिलाएं भी एक सुरक्षित ऑनलाइन स्पेश की तलाश में रहतीं हैं, चाहे वह पेशेवर मार्गदर्शन और नेटवर्किंग के लिए हो, या व्यक्तिगत समस्याओं पर चर्चा करने के लिए हो.

33-वर्षीया दीप्ति (जो अपना अंतिम नाम जाहिर नहीं करना चाहती थीं) लीप.क्लब का हिस्सा हैं, जो दिल्ली में महिलाओं के लिए एक नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म है. वे कहती हैं कि इस तरह के स्पेस उन्हें अग्रणी पदों पर आसीन महिलाओं तक पहुंच प्रदान करते हैं.

दीप्ति ने कहा, ‘(वहां) वर्जनाओं को तोड़ने, काम और जीवन के बीच एक अच्छा संतुलन कैसे बनाया जाए आदि के बारे में बातचीत होती रहतीं हैं.’

कोटो की नींव वेब3, यानि कि तीसरी पीढ़ी का इंटरनेट है, जो एल्गोरिदम में हेरफेर, पहचान की चोरी (आइडेंटिटी थेफ़्ट) और डेटा ब्रीच जैसी समस्याओं को दूर करेगा. डाटा की गोपनीयता सुनिश्चित करने और वेब 2 की सभी खामियों को पूरा करने के लिए इसमें ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया जाएगा.

कटियाल कहते हैं, ‘यह प्लेटफार्म इसके सदस्यों को स्वतंत्र रूप से विषयवस्तु (कंटेंट) तैयार करने, इसे संवारने, इसका उपभोग करने और इसका स्वामित्व हासिल करने में सक्षम करेगा. ब्लॉकचेन की विकेंद्रीकृत प्रकृति गोपनीयता से जुड़े मुद्दों पर नियंत्रण पाने में मदद करेगी.’


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क्यों पड़ी कोटो की जरुरत?

इंटरनेट ने हमारे आपस में संवाद करने के तरीके में क्रांति ला दी है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ऐसी जगह हैं जहां लोग सूचनाओं का प्रसार, विचारों का आदान-प्रदान आदि करते हैं.

हालांकि, एक डेटाबेस कंपनी स्टेटिस्टा द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण, जिसका शीर्षक है ‘ जेंडर डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ सोशल मीडिया ऑडिएंसेस वर्ल्डवाइड अस ऑफ़ जनुअरी 2022, बाई प्लेटफार्म (जनवरी 2022 तक दुनिया भर में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के यूजर्स का लैंगिक वितरण) के अनुसार ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे लगभग सभी बड़े सोशल प्लेटफॉर्म पर पुरुषों की संख्या महिलाओं से काफी अधिक है. ऐसा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया भर में है.

इसी साल जनवरी में, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा था कि कोरोना महामारी के फैलने के बाद से ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में पांच गुना वृद्धि हुई है.

कटियाल ने कहा, ‘(पंजीकरण के समय) किसी को भी बस एक बुनियादी केवाईसी प्रक्रिया से गुजरना होगा जिसमें चेहरे की पहचान किया जाना भी शामिल होगा. हम जानना चाहेंगे कि आप महिला हैं या नहीं. ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों को भी इससे जुड़ने का सामान अवसर मिलेगा. यदि कोई व्यक्ति बिल्कुल भी अपनी पहचान जाहिर नहीं करना चाहता है, तो वह पंजीकरण के बाद समुदाय के अन्य सदस्यों के साथ बातचीत करते हुए अपनी पहचान छुपाने का विकल्प चुन सकता है. हमारे पास सभी प्रकार के निजता से सम्बंधित नियंत्रण (प्राइवेसी कण्ट्रोल) होंगे.’

इस प्लेटफार्म का इरादा महिला उद्यमियों के लिए इस प्लेटफार्म पर ऑनलाइन मार्केटप्लेस (बाजार) के माध्यम से इसके सदस्यों को अपने व्यावसायिक उत्पादों को प्रदर्शित करने में मदद करना भी है.

कटियाल ने कहा, ‘इन मार्केटप्लेसेस से हमें भी फायदा होगा क्योंकि हमें इन लेनदेन (ट्रांजैक्शनस) में अपना हिस्सा (कमीशन) मिलेगा. इसलिए, यह सभी के लिए फायदे का सौदा है.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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