चेन्नई, 16 जुलाई (भाषा) तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के लोकसभा सांसद एस. सेंथिलकुमार ने हिंदू पुजारी से सड़क परियोजना के लिए ‘भूमि पूजन’ कराए जाने पर आपत्ति जताई और कहा ऐसे किसी भी कार्यक्रम में सभी धर्मों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाना चाहिए।
धर्मपुरी से लोकसभा सदस्य सेंथिलकुमार ने अपने गृह जिले में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर एक अधिकारी से पूछा कि क्या वह जानते हैं कि एक सरकारी समारोह इस तरह से आयोजित नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें केवल एक विशेष धर्म की प्रार्थना शामिल हो।
उन्होंने कहा, ”श्रीमान, आपको पता है या नहीं कि सरकारी समारोह इस तरह नहीं होने चाहिए। आप जानते हैं या नहीं।”
भगवा वस्त्र पहने हिंदू पुजारी की ओर इशारा करते हुए सांसद ने अधिकारी से पूछा, ”यह क्या है? अन्य धर्मों के प्रतिनिधि कहां हैं? ईसाई और मुस्लिम कहां हैं? गिरजाघर के पादरी और इमाम को आमंत्रित कीजिए। उन लोगों को आमंत्रित कीजिये, जो किसी धर्म को नहीं मानते। द्रविडर कषगम (प्रतिनिधियों) को बुलाइए।”
द्रविडर कषगम एक तर्कवादी संगठन है, जिसकी स्थापना सामाजिक न्याय के पुरोधा कहे जाने वाले ई.वी. रामासामी ने किया था। यह सत्तारूढ़ दल द्रमुक का मूल संगठन है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तमिलनाडु इकाई के उपाध्यक्ष एन. तिरुपति ने सेंथिलकुमार के रवैये की कड़ी आलोचना की और पूछा कि यदि अधिकारी मुस्लिम होता या फिर अधिकारी इस्लामिक रीति-रिवाज से प्रार्थना कराते, तब भी क्या सांसद का यही रवैया होता।
उन्होंने कहा कि सांसद को पूजा कर्मचारियों की आस्था को ध्यान में रखते हुए कराई जाती है और यह सरकार के लिए नहीं की जाती। सांसद को जनता की आस्था का अपमान करने के लिए माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सेंथिलकुमार का व्यवहार ”बचकाना” था।
सांसद के सवाल पूछने पर अधिकारी ने बताया कि वह लोक निर्माण विभाग का कार्यकारी अभियंता है। उसने सांसद से माफी मांगी।
सेंथिलकुमार ने अधिकारी से कहा, ”यह द्रविड़ शासन मॉडल है। सरकार सभी धर्मों से संबंध रखने वाले लोगों के लिए है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह पूजा कराने के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन इस प्रकार के कार्यक्रमों में सभी धर्म के लोग शामिल होने चाहिए।
सांसद ने अधिकारी से हुई बातचीत का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया।
उन्होंने लिखा, ”खुद को शांत रखने की कोशिश कर रहा हूं। कभी-कभी वे मुझे मेरा धैर्य खोने के लिए मजबूर कर देते हैं।”
भाषा जोहेब माधव
माधव
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