नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता चिराग पासवान ने बृहस्पतिवार को सरकार द्वारा उनके परिवार को जनपथ स्थित सरकारी बंगले से बेदखल किए जाने के तरीके पर निराशा जताई।
चिराग ने कहा कि उन्हें कोई वैकल्पिक सरकारी आवास नहीं मुहैया कराया गया है, जिसके वह संसद के एक सदस्य के तौर पर हकदार हैं।
चिराग जनपथ स्थित उस सरकारी बंगले पर पहुंचे, जहां शहरी विकास मंत्रालय द्वारा बुधवार को परिसर को खाली कराने की कवायद शुरू की गई थी और वहां मौजूद अपने दिवंगत पिता रामविलास पासवान की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
बाद में संवाददाताओं से बातचीत में चिराग ने कहा कि वह नियम-कायदों और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और उन्होंने कभी भी यह मांग नहीं की कि उनके परिवार को बंगले में स्थाई रूप से रहने की इजाजत दी जाए।
चिराग ने कहा, “हमें आज नहीं तो कल, बंगला खाली करना ही था। हालांकि, मुझे बंगला खाली कराने के तरीके पर थोड़ी आपत्ति है।”
मंत्री स्तर का यह बंगला 1990 में उनके पिता राम विलास पासवान को आवंटित किया गया था, जो तब से लेकर 2020 में अपने निधन तक की ज्यादातर अवधि में मंत्री थे।
जमुई से सांसद चिराग के मुताबिक, उनका परिवार अतिरिक्त समयसीमा दिए जाने के बाद उस बंगले में रह रहा था।
उन्होंने कहा, “मेरा परिवार कानूनी प्रक्रिया का पूरा सम्मान करता है। कोई व्यक्ति किसी स्थान को जबरन नहीं रख सकता, यदि वह उसका हकदार नहीं है। निश्चित तौर पर यह (बेदखली की प्रक्रिया) जिस तरह से किया गया, उससे मैं निराश हूं। मैं दूसरी बार सांसद बना हूं और मुझे कोई वैकल्पिक आवास दिया जाना चाहिए था।”
चिराग ने कहा कि उनके पास अभी कोई सरकारी आवास नहीं है और वह राष्ट्रीय राजधानी में अपनी नानी के घर में शिफ्ट हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि बंगले से उनके पिता की कई यादें जुड़ी हुई हैं और लोजपा के संस्थापक के लगभग सौ करीबी सदस्य वहां रह रहे थे।
चिराग ने कहा, “मैं इन लोगों की मदद के लिए हर संभव प्रयास करूंगा।”
भाषा पारुल उमा
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