पणजी, चार फरवरी (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को यहां कहा कि यदि ग्लोबल वार्मिंग को पूर्व-औद्योगिक स्तर से ऊपर 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने का लक्ष्य हासिल करना है तो विकसित देशों को अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा।
वह पहले अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण और संवहनीयता शिखर सम्मेलन के समापन समारोह में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करने की आवश्यकता है, लेकिन जलवायु न्याय के बारे में भी बोलने की आवश्यकता है। जब ग्लासगो में (2021 जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान) कहा गया कि हमें जीवाश्म ईंधन का उपयोग बंद कर देना चाहिए, तो विकसित देशों ने जीवाश्म ईंधन का उपयोग बंद करने में सक्षम बनाने के लिए 100 अरब डॉलर (विकासशील देशों को वार्षिक रूप से) देने का वचन दिया।’’
यादव ने कहा, ‘‘विकसित देशों ने 100 अरब डॉलर देने के अपने वादे को पूरा नहीं किया है। यदि आप अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करते हैं, तो दुनिया पृथ्वी के तापमान को 1.5 डिग्री तक सीमित करने के अपने लक्ष्य को कैसे प्राप्त करेगी।”
यादव ने कहा कि भारत में दुनिया की आबादी का 17 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन यह केवल चार प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन करता है, वहीं विकसित देशों में दुनिया की कुल आबादी का 17 प्रतिशत है, लेकिन उनका कुल कार्बन उत्सर्जन 60 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दुनिया के हर हिस्से में स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड’ में विश्वास करते हैं।’
भाषा नेत्रपाल माधव
माधव
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
