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Sunday, 31 August, 2025
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दिल्ली: नेपाली नागरिकों को निशाना बनाकर वीज़ा धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो लोग गिरफ्तार

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नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) दिल्ली पुलिस ने सर्बिया में नौकरी के लिए वीजा उपलब्ध कराने के नाम पर 19 नेपाली नागरिकों से लगभग 70 लाख रुपये की ठगी को अंजाम देने वाले वीजा धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।

आरोपियों की पहचान ग्रेटर नोएडा निवासी जैकब (41) और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के छावला निवासी रूपेश (42) के रूप में हुई है।

पुलिस उपायुक्त (अपराध) विक्रम सिंह ने बताया कि 22 वर्षीय एक नेपाली नागरिक द्वारा एक शिकायत दर्ज कराने के बाद इस गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस में दी शिकायत में नेपाली नागरिक ने कहा था कि वह और 18 अन्य लोग इस घोटाले का शिकार हुए हैं।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने अप्रैल 2024 में जगजीत नगर, सीलमपुर में उससे व अन्य साथियों से संपर्क किया और सर्बिया में नौकरी दिलाने का वादा किया था। उनका विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने उन्हें कथित सर्बियाई वीज़ा और नौकरी के प्रस्तावों की स्कैन की हुई प्रतियां दिखाईं। इसके बाद पीड़ितों ने अपने मूल पासपोर्ट उन्हें सौंप दिए और क्यूआर कोड-आधारित लेनदेन के माध्यम से लगभग 70 लाख रुपये का भुगतान कर दिया।

पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) ने कहा, ‘‘पीड़ित इस वर्ष जुलाई में दिल्ली पहुंचे और उन्हें उम्मीद थी कि वीजा हासिल कर वे सर्बिया चले जाएंगे, लेकिन आरोपियों ने उन्हें टरकाना शुरू किया और बाद में उनके पासपोर्ट या पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।’’

अधिकारी ने बताया कि पीड़ितों ने जब उनसे सीधे बात की तो आरोपियों ने उन्हें कथित रूप से धमकी भी दी। वीजा सत्यापन में उनके फर्जी होने का पता चला जिससे बिना कागजात और पैसों के पीड़ित फंस गए।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत 25 अगस्त को मामला दर्ज किया गया। जैकब को ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार किया गया और उसके पास से नेपाल निवासी 13 लोगों के पासपोर्ट तथा एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।

जैकब के खुलासे के बाद पुलिस ने उसके साथी रूपेश को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, सचिन और जॉर्ज उर्फ ​​बिजोज नाम के उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है।

पुलिस ने पाया कि पीड़ितों से ली गई राशि में से लगभग 60 लाख रुपये हवाला के माध्यम से उनके सहयोगियों के बैंक खातों में जमा कर दिए गए थे।

रकम का कुछ हिस्सा जैकब की पत्नी और दोस्तों के खातों में भी अंतरित किया गया।

भाषा यासिर पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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