नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) दिल्ली पुलिस ने चोरी के मोबाइल फोन की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुये इसके आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह चोरी किये गये और छीने गये फोन को पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश में तस्करी करता था। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि आरोपी एक सुसंगठित नेटवर्क का हिस्सा थे जो राष्ट्रीय राजधानी में डीटीसी बसों में जेबकतरों, लुटेरों और झपटमारों से चोरी के फोन खरीदते थे और सीमावर्ती इलाकों में स्थित संचालकों की मदद से उन्हें बांग्लादेश में तस्करी करते थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से लगभग 50 लाख रुपये मूल्य के 294 मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें से 45 का मिलान प्राथमिकी और 30 के गुम होने की रिपोर्ट से किया गया है।
उन्होंने बताया, ‘‘गिरोह के सदस्य बांग्लादेश में अपने संपर्कों के साथ मिलकर काम करते थे, जिन्होंने अपने सहयोगियों के माध्यम से चोरी के उपकरणों को इकट्ठा करने की व्यवस्था की थी।’’
डीसीपी (दक्षिण) अंकित चौहान ने कहा, ‘यह गिरोह तब प्रकाश में आया जब तकनीकी निगरानी और क्षेत्रीय खुफिया जानकारी से पुष्टि हुई कि चोरी के मोबाइल उपकरणों की भारत से तस्करी की जा रही थी।’’
अधिकारी ने बताया कि यह अभियान 27 जुलाई को शुरू हुआ, जब डीटीसी बसों में चोरी करने वाले एक गिरोह के बारे में मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया और चार लोगों – दिनेश उर्फ हड्डल (52), रिजवान उर्फ कमांडो (38), रवि (30) और अजय (41) को गिरफ्तार किया। ये सभी दिल्ली के रहने वाले हैं।
पुलिस ने उनके पास से 38 मोबाइल फोन जब्त किए हैं।
डीसीपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने खुलासा किया कि चोरी के फोन गोविंदपुरी निवासी राहुल उर्फ पिचतर (30) को दिए जाने थे, जिसे सात अगस्त को एक आईफोन समेत चोरी के पांच फोन के साथ गिरफ्तार किया गया था।
राहुल की गिरफ्तारी से पुलिस संगम विहार निवासी मोजाहिर उर्फ समीर तक पहुंची, जिसने कथित तौर पर चोरी के उपकरण एकत्र किए और उन्हें कोलकाता पहुंचाने में मदद की।
डीसीपी ने कहा, ‘मोजाहिर पश्चिम बंगाल के नादिया निवासी मोहम्मद खालिद उर्फ पप्पू (50) के लगातार संपर्क में था, जिसके बांग्लादेश में रिश्तेदार और सीमावर्ती इलाके में संपर्क थे।’
इसके बाद एक टीम कोलकाता भेजी गई, जिसने 21 अगस्त को खालिद को गिरफ्तार कर लिया।
उन्होंने बताया कि खालिद के घर की तलाशी में चोरी के 30 फोन बरामद हुए, जिनमें से कुछ दक्षिणी दिल्ली में चोरी और झपटमारी की घटनाओं से जुड़े थे।
डीसीपी ने बताया कि खालिद के फोन में कई बांग्लादेशी नागरिकों के संपर्क विवरण थे।
पूछताछ के दौरान, उसने स्वीकार किया कि बांग्लादेशी हैंडलर उससे फोन लेने के लिए अपने साथियों को भेजते थे।
अधिकारी ने बताया कि खालिद को 22 अगस्त को कोलकाता की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से दिल्ली पुलिस को उसकी तीन दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली।
जांच में यह भी पता चला कि मोजाहिर और उसका साथी शिवम कुमार झा (22) चोरी के फोन पहुंचाने के लिए महीने में कम से कम चार बार कोलकाता आते थे।
डीसीपी ने बताया कि 23 अगस्त को दोनों को दिल्ली में हिरासत में लिया गया और उनके पास से 75 मोबाइल फ़ोन ज़ब्त किए गए। उन्होंने बताया कि खालिद को मोजाहिर से बांग्लादेश में तस्करी के लिए लगभग 1,000 चोरी के फ़ोन मिले थे।
अधिकारी ने कहा कि यह नेटवर्क दिखाता है कि कैसे चोर चोरी के उपकरणों को विदेश भेजने की कोशिशें तेज़ कर रहे हैं क्योंकि दूरसंचार विभाग द्वारा शुरू किया गया सीईआईआर (सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर) पोर्टल आईएमईआई नंबर ब्लॉक करके उन्हें भारत में इस्तेमाल करने लायक नहीं बनाता।
चौहान ने कहा, ‘एक बार ब्लॉक हो जाने के बाद, इन फ़ोनों का भारत में किसी भी सिम कार्ड के साथ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जिससे इनका दोबारा बिक्री मूल्य कम हो जाता है। यही वजह है कि गिरोह सीमा पार अवैध रास्तों से इन्हें खपाने की कोशिश करते हैं।’
पुलिस ने कहा कि खालिद के फ़ोन की जांच से तीन सक्रिय बांग्लादेशी नंबर मिले हैं, जिनके बारे में शक है कि ये फ़ोन प्राप्त करने वाले संचालकों के हैं, और उनकी पहचान करने और रैकेट में उनकी भूमिका स्थापित करने के प्रयास जारी हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों से 194 मोबाइल फोन सीधे बरामद किए गए हैं, इसके अलावा सीईआईआर पोर्टल के ज़रिए 100 मोबाइल फोन का पता लगाया गया है। इनमें से 45 का मिलान एफआईआर से और 30 का गुमशुदगी की रिपोर्ट से किया गया है।
पुलिस ने आरोपियों का विवरण साझा करते हुए बताया कि खालिद का पश्चिम बंगाल में आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, जो पहले बढ़ई का काम करता था, जबकि दसवीं पास मोजाहिर दिल्ली और कोलकाता में चोरी के आठ मामलों में शामिल है।
शिवम एक चोरी के मामले में शामिल था, जबकि दिनेश, रिज़वान, रवि, अजय और राहुल सभी आदतन अपराधी हैं और उनके खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में चोरी के कई मामले दर्ज हैं।
भाषा रंजन नरेश
नरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.