नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) दिल्ली पुलिस ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पॉलिटेक्निक विभाग के एक कर्मचारी पर एक संकाय सदस्य द्वारा हमला करने के आरोप की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने कहा कि हालांकि, धर्मांतरण का कोई आरोप नहीं लगाया गया है, जैसा कि सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है।
विश्वविद्यालय ने हमले के आरोप और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को छेड़छाड़ किया हुआ बताते हुए खारिज कर दिया है।
पुलिस के एक बयान के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के ओखला इलाके में स्थित संस्थान के एक कर्मचारी ने सोमवार को सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एक एसोसिएट प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
कर्मचारी ने आरोप लगाया कि 13 जनवरी को एसोसिएट प्रोफेसर उसकी डेस्क पर आए, आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया और उसके साथ हिंसक व्यवहार किया।
पुलिस ने बयान में कहा, ‘कानून के मुताबिक, कानूनी कार्रवाई की जा रही है। बयान दर्ज किए जा रहे हैं और सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं।’
पुलिस ने इस विवाद में धर्मांतरण के किसी भी कोण से इनकार किया है।
पुलिस के बयान में कहा गया, ‘यह स्पष्ट किया जाता है कि शिकायतकर्ता ने जबरन धर्मांतरण के किसी भी प्रयास के संबंध में कोई आरोप नहीं लगाया है। ऐसी खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत और बेबुनियाद हैं।’
पुलिस ने मीडिया और जनता से ऐसी अपुष्ट जानकारी प्रसारित न करने का आग्रह किया है, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित हो सकता है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि शिकायतकर्ता पॉलिटेक्निक विभाग में यूडीसी है।
इस बीच, जामिया मिल्लिया इस्लामिया की आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, ‘हमें अपने कर्मचारी की ओर से किसी मारपीट या जाति-आधारित घटना के संबंध में कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है।’
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर हमले का जो वीडियो प्रसारित हो रहा है, उसके साथ छेड़छाड़ की गई है।
प्रवक्ता ने कहा कि ऑनलाइन प्रसारित किए जा रहे वीडियो का किसी भी कथित हमले से कोई लेना-देना नहीं है।
भाषा नोमान दिलीप
दिलीप
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