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Thursday, 19 March, 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट ने मानहानि मामले में अर्णब गोस्वामी को समन भेजा

हालांकि, न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने यह देखते हुए कि प्रसारण मई, 2025 में हुआ था इस मामले में इस चरण में सामग्री के खिलाफ अंतरिम रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया.

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नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को कांग्रेस द्वारा दर्ज कराए गए मानहानि मामले में समन भेजा.

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि गोस्वामी ने यह झूठा दावा किया था कि तुर्किये में स्थित इस्तांबुल कांग्रेस सेंटर, पार्टी का राजनीतिक कार्यालय है.

हालांकि, न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा ने यह देखते हुए कि प्रसारण मई, 2025 में हुआ था इस मामले में इस चरण में सामग्री के खिलाफ अंतरिम रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया.

पार्टी के वकील ने आरोप लगाया कि गोस्वामी ने पहलगाम आतंकवादी हमले की पृष्ठभूमि में झूठा दावा किया और इससे पार्टी की प्रतिष्ठा को ‘लगातार नुकसान पहुंच रहा है.”

वकील ने कहा, “मैं (मुकदमे में) अंतरिम रोक का अनुरोध करता हूं… मैं यह आग्रह भी करता हूं कि सामग्री पर रोक लगाई जाए… आपत्तिजनक सामग्री से नुकसान होता रहता है. लोग अभी भी इसके बारे में बात कर रहे हैं. उन्होंने स्वीकार किया है कि यह झूठी है.”

शिकायत पर विचार करने वालीं न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा ने कहा, “प्रसारण 15 मई 2025 को हुआ था…मैं जल्द आने वाली कोई तिथि तय करूंगी.”

अदालत ने गोस्वामी को याचिका को लेकर चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया और मामले को सुनवाई के लिए 19 मई को सूचीबद्ध कर दिया.

अदालत ने कहा, “शिकायत को मुकदमे के तौर पर दर्ज करें. समन जारी करें.”

मई 2025 में भारतीय युवा कांग्रेस के कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख श्रीकांत स्वरूप बी एन ने भी बेंगलुरु पुलिस के समक्ष भाजपा आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय और गोस्वामी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें दोनों पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया था.

प्राथमिकी के तौर पर दर्ज की गई शिकायत में दावा किया गया था कि मालवीय और गोस्वामी ने ‘दुर्भावनापूर्ण ढंग से यह मनगढ़ंत दावा किया’ कि तुर्किये में इस्तांबुल कांग्रेस सेंटर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का कार्यालय है.

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तुर्किये द्वारा पाकिस्तान को कथित रूप से समर्थन दिए जाने के कारण भारत और तुर्किये के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच मालवीय और गोस्वामी ने यह हरकत की.

इस मामले की जांच पर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी.

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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