नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने उन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में सभी शैक्षणिक संस्थानों, स्कूलों और स्टेडियमों से नोडल अधिकारी नामित करने और उनकी जानकारी साझा करने को कहा है. सरकार ने ऐसे दावों को “फर्जी खबर” करार दिया है. यह जानकारी एक आधिकारिक नोटिस के जरिए दी गई.
दिल्ली शिक्षा निदेशालय की केयरटेकिंग ब्रांच द्वारा जारी नोटिस में स्कूलों को एक निर्धारित प्रारूप में नोडल अधिकारियों का विवरण भेजने के निर्देश दिए गए हैं. इसमें नोडल अधिकारी का नाम, पदनाम, संपर्क नंबर और ईमेल आईडी शामिल है. यह जानकारी सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के साथ-साथ स्टेडियमों और खेल परिसरों से मांगी गई है.
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश 7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश और 20 नवंबर को हुई फॉलो-अप बैठक के मद्देनजर जारी किया गया है, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े शीर्ष प्राथमिकता वाले उपायों पर चर्चा हुई थी. दिल्ली सरकार ने साफ तौर पर कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को आवारा कुत्तों की गणना (सेंसस) करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है.
नोटिस में कहा गया है, “यह मामला सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है, विशेष रूप से 07.11.2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश और 20.11.2025 को हुई बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन से संबंधित है. इसे शीर्ष प्राथमिकता के रूप में लिया जाए और आवश्यक जानकारी 26/11/2025 तक उपलब्ध कराई जाए, ताकि इसे दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव कार्यालय को भेजा जा सके.”
दिल्ली सरकार ने कहा कि कुछ खबरों में इस परिपत्र की गलत व्याख्या की गई, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई. नोटिस में दोहराया गया कि नोडल अधिकारी नामित करने को लेकर जारी निर्देश का आवारा कुत्तों की गणना से कोई संबंध नहीं है.
सरकार ने कहा, “यह मामला सार्वजनिक सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन से संबंधित है. इस परिपत्र को आवारा कुत्तों की गणना से जोड़ने वाले सभी दावे पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं.”
