सूरी (पश्चिम बंगाल), 15 मार्च (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने रविवार को पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों द्वारा सही पाए गए मतदाताओं की पूरक सूची प्रकाशित किए बिना ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने के लिए निर्वाचन आयोग की आलोचना की। पार्टी ने उन लोगों के चुनाव लड़ने और मतदान के अधिकारों में कटौती किए जाने पर भी सवाल उठाए, जो वर्तमान में आयोग की जांच के दायरे में हैं।
पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम ने जिला मुख्यालय बीरभूम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा और तृणमूल की राजनीतिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्य में लाखों मतदाताओं को मतदाता सूची में उनकी वैधता पर संदेह के आधार पर अवैध रूप से निलंबित रखा गया है।
सलीम ने तर्क दिया, ‘संविधान देश के नागरिकों को चुनाव लड़ने का अधिकार देता है। आयोग की संदिग्ध मतदाता सूची में अभी भी 60 लाख से अधिक लोग शामिल हैं, ऐसे में वे नामांकन पत्र दाखिल करने का अवसर खो देंगे, भले ही उनका नाम बाद में प्रकाशित होने वाली पूरक सूची में ही क्यों न आ जाए। नामांकन फॉर्म के लिए मतदाता सूची के भाग और क्रम संख्या के रूप में अपने मतदाता विवरण देना अनिवार्य है, जो वे नहीं कर पाएंगे।’’
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव कराए जाने की घोषणा की। राज्य में मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा और नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि क्रमशः 7 और 10 अप्रैल है।
सलीम ने कहा, ‘जब निर्वाचन आयोग त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार नहीं कर सकता, तो आप उससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?’
भाषा
शुभम दिलीप
दिलीप
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