Saturday, 20 August, 2022
होमदेश'साधुओं को न होगा कोरोना': कुंभ में नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले भगवान भरोसे

‘साधुओं को न होगा कोरोना’: कुंभ में नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले भगवान भरोसे

1 अप्रैल को शुरू होकर 30 अप्रैल तक चलने वाले हरिद्वार कुंभ मेले में शामिल हुए 1,701 लोग 10 से 14 अप्रैल के बीच कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए हैं.

Text Size:

हरिद्वार: हरिद्वार में कुंभ मेले में लगे बड़े से लाउडस्पीकर से एक आवाज आती रहती है. इसमें एक बार में ये पूरा संदेश गूंजता है, ‘दूरी बनाए रखें और कोरोनावायरस से सुरक्षित रहें. हर समय हर मास्क पहने रहें.’ लेकिन मेले में जुटे भक्तों और साधु-संतों को शायद कुछ और ही सुनाई देता है.

गंगा में डुबकी लगाकर गीले कपड़ों में ही खड़े पश्चिम बंगाल से आए 48 वर्षीय बाबा प्रकाश पुरी महाराज ने कहा, ‘यह भगवान की आवाज है, जो कहती है कुछ नहीं होगा. भगवान ने हमारे साथ कुछ नहीं होने दिया है. मुझे पूरा विश्वास है कुछ नहीं होगा. इसके कुछ ही क्षण पहले तट पर जुटे उनके जैसे हजारों लोगों ने बमुश्किल ही एक इंच भी दूरी बनाते हुए गंगा में स्नान किया.

हर की पौड़ी—जहां भक्तों का जमावड़ा है—वह स्थान है जहां पहाड़ों से नीचे आ रही रही गंगा पहली बार मैदान पर पहुंचती है. माना जाता है कि यह सबसे पवित्र घाट है क्योंकि भगवान विष्णु ने गुजरात के भावनगर जाते समय रास्ते में अपना पग यहीं पर रखा था.

सालों-साल से लाखों की संख्या में भक्त यहां आते हैं, गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाते हैं और इसके तट पर पूजा-अर्चना करते हैं.

Thousands gathered for the Ganga aarti at Haridwar Wednesday evening | Simrin Sirur | ThePrint
गंगा आरती के दौरान हजारों की संख्या में बुधवार को श्रद्धालु एकत्रित हुए/फोटो: सिमरन सिरुर/दिप्रिंट

हरिद्वार में 2021 के कुंभ मेले, जो 1 अप्रैल से शुरू हुआ था और 30 अप्रैल तक चलेगा, में बुधवार को तीसरे ‘शाही स्नान’ पर 13,51,631 लोगों का जुटना कोई बड़ी बात नहीं है. सूर्यास्त के समय हरिद्वार और राज्य के बाहर से आए हजारों लोग प्रतिदिन गंगा आरती में शामिल होते रहे हैं.

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

देश में कोविड संक्रमण की दूसरी लहर तेजी से फैल रही हैं लेकिन यह बात शायद कुछ ही लोगों को परेशान करती है. मेले में किसी की जांच तक नहीं हो रही जहां 50 टेस्टिंग बूथ लगाए गए हैं.

हरिद्वार में बुधवार शाम तक कोविड-19 के 525 नए केस दर्ज किए गए थे, जिनमें 119 लोग मेले में शामिल रहे थे. 10 और 14 अप्रैल के बीच 1,701 श्रद्धालुओं को पॉजिटिव पाया गया था. इस बीच, भारत ने गुरुवार को एक नया शीर्ष स्तर छू लिया, जब दैनिक आंकड़ा 2 लाख से पार पहुंच गया.

महामारी के बीच कुंभ मेले का आयोजन शुरू से ही विवादास्पद रहा है. हालांकि, उत्तराखंड के अधिकारियों ने अपना फैसला जायज ठहराते हुए सभी सावधानियां बरते जाने का वादा किया था, जैसे कोविड नियमों के उल्लंघन न हो इसके लिए ड्रोन से निगरानी की जाएगी और केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश मिलेगा जिनके पास कोविड निगेटिव की वैध रिपोर्ट होगी.

हालांकि, जमीनी स्तर पर पाबंदियों का पालन कराने, मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल कराने में पुलिस के पसीने छूट गए. और रैंडम स्तर पर जांच के लिए नमूने लेने की व्यवस्था भी नहीं दिखी. कई भक्तों को तो लगता है कि कोविड का पूरा मामला बेवजह का शोरशराबा है, और वे पूरी तरह आश्वस्त हैं कि उनकी आस्था उन्हें कुछ नहीं होने देगी.

एक अन्य साधु, जिसने अपनी पहचान सिर्फ ‘महात्मा’ बताई, ने कहा, ‘देखो कोविड सिर्फ उन लोगों को प्रभावित कर रहा है जो लालची है, एसी में सोते हैं और जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है. हम साधु जमीन पर सोते हैं, हमारी प्रतिरक्षा मजबूत होती है. हम हर चीज के पीछे भागते नहीं हैं. कोविड हमारा कुछ नहीं बिगाड़ेगा. यह केवल चोरों को प्रभावित करता है.’


यह भी पढ़ें: मोदी सरकार और ज्यादा कोविड वैक्सीन चाहती है, लेकिन मॉडर्ना ‘इच्छुक नहीं’ और फाइज़र की है ये ‘शर्त’


‘पाबंदी लगाना संभव नहीं’

कुंभ मेला क्षेत्र ऋषिकेश सहित हरिद्वार, टिहरी और देहरादून जिले के कुछ इलाकों को मिलाकर करीब 670 एकड़ में फैला हैं. सरकार की तरफ से अपने फैसले को उचित ठहराने के लिए यह अहम तर्क यह भी दिया गया था कि मेला खुले क्षेत्र में आयोजित किया गया है.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने तो इस सप्ताह के शुरू में यहां तक कहा था कि ‘मां गंगा का प्रवाह और आशीर्वाद कोरोनावायरस को फैलने नहीं देगा.’

मेला अधिकारी दीपक रावत, जिन्हें राज्य सरकार की तरफ से मेला के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ने कहा, ‘मेला आम तौर पर जनवरी में शुरू होता है लेकिन कोविड की वजह से इसे अप्रैल में शुरू किया गया और इसकी कुल अवधि तीन के बजाये एक महीने ही रखी गई है. हमने केंद्र सरकार से मार्गदर्शन मांगा, और उन्होंने हमें एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया बताई, जिसका हम पालन कर रहे हैं. यह बहुत ही आसान रखी गई है.’

हालांकि, हरिद्वार में भक्ति भावना के आवेग के बीच कोविड-19 दिशानिर्देशों का खुले तौर पर उल्लंघन हो रहा है.

घूमकर देखने पर पता चलता है कि अखाड़ों (भक्त/संतों के समूह) और हर की पौड़ी क्षेत्र में लोग बिना मास्क लगाए संकरी गलियों से गुजर रहे हैं, पुलिस भी नियमों को पालन कराने के प्रति गंभीर नहीं दिख रही है.

जब शाम की आरती शुरू हुई, तो बड़ी संख्या में लोग वहां पर जुट गए, इसमें से कुछ तो मास्क भी नहीं पहने हुए थे. पुलिस ने भीड़ पर नजर तो रखी लेकिन दूरी बनाए रखने के लिए कोई आग्रह तक नहीं किया. ड्रोन भी हवा में उड़ान भरते दिखे लेकिन व्यवस्था उतनी चाक-चौबंद नहीं थी जितनी होनी चाहिए थी.

हर की पौड़ी में तैनात एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘यह एक छोटा-सा क्षेत्र है, और दर्शन और स्नान सबके लिए बहुत मायने रखता है. किसी भी तरह से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना संभव नहीं है. कभी-कभी तो लोग बात सुनते और मानते हैं लेकिन कभी कुछ नहीं सुनते और सारे नियमों को तोड़ देते हैं. लेकिन इसे जबरन लागू कराना संभव नहीं है.’

कुंभ के लिए कोविड नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना के अनुसार, मेला में लगाए गए 50 टेस्टिंग बूथ में हर दिन 50,000 से अधिक टेस्ट करने की क्षमता है.

1 अप्रैल को उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा कि संक्रमण रोकने के उपायों के तहत मेले में प्रतिदिन 50,000 टेस्ट किए जाएं, लेकिन इस आदेश का पालन करना प्रशासन के लिए एक चुनौती है.

जानकारी के मुताबिक, अधिकांश लोग जो टेस्ट के लिए आए वे अपनी खुद की इच्छा से बूथ पर आए, रैंडम आधार पर नमूने लेने में कोई सक्रियता नहीं दिखी.

शाही स्नान के दिनों में, जो इस बार तीन ही थे, कम से कम दो टेस्टिंग बूथ (महिला घाट और मालवीय घाट) में टेस्ट करना मुश्किल था क्योंकि यह क्षेत्र संतों को छोड़कर बाकी लोगों के लिए बंद था.

डॉ. खन्ना ने कहा, ‘लोगों का टेस्ट करना काफी मुश्किल है. हमारे कुछ टेस्टिंग स्टाफ ने पुलिस सुरक्षा का अनुरोध किया है क्योंकि परीक्षण के लिए कहने पर कई बार लोग आक्रामक हो जाते हैं.’

जब दिप्रिंट ने दौरा किया गया था, ज्यादातर टेस्टिंग बूथ खाली मिले, जबकि इसके आसपास काफी भीड़ जमा थी. डॉक्टरों और नर्सों ने लोगों को टेस्ट के लिए प्रेरित करने के बजाये उनके बूथों पर आने का इंतजार किया.

कोविड टेस्ट करने के काम में लगे एक नर्सिंग छात्र राकेश आर्य ने कहा, ‘जहां हमारा बूथ लगा है, वह एक ऐसा क्षेत्र है जहां ज्यादातर स्थानीय निवासी आते-जाते दिखते हैं. जब हम उन्हें मास्क पहनने या टेस्ट कराने के लिए कहते हैं, तो वे हमें बताते हैं कि वे यहीं के रहने वाले हैं और उन्हें इसकी कोई जरूरत नहीं है और हम उन्हें उनके हाल पर छोड़ दें. बाहर के आने वाले लोगों के लिए निगेटिव टेस्ट रिपोर्ट अनिवार्य है जबकि स्थानीय लोगों को छूट प्राप्त है.’

बुधवार को बूथों पर 13,415 रैपिड एंटीजन टेस्ट और आरटी-पीसीआर किए गए, जिनमें से 119 लोग पॉजिटिव पाए गए.

10 अप्रैल से सामने आए 1,701 मामलों के संदर्भ में समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए हरिद्वार के मुख्य चिकित्सा अधिकारी शंभु कुमार झा ने कहा कि ये ट्रेंड बताता है कि कुंभ मेला क्षेत्र में संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 2,000 तक पहुंचने की संभावना है.


य़ह भी पढ़ें: वैक्सीन और बेड्स के सहारे कोविड से लड़ने को तैयार है हरियाणा, लॉकडाउन की ज़रूरत नहींः मंत्री अनिल विज


पुराने निगेटिव सर्टिफिकेट के साथ मेले में पहुंचे

भारी भीड़ के बावजूद मेला अधिकारी रावत का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण का जोखिम ‘कम’ ही है.

उन्होंने कहा, ‘केवल निगेटिव सर्टिफिकेट वाले लोगों को ही प्रवेश की अनुमति है. इसलिए संक्रमण फैलने का जोखिम कम ही है. जुलूस आदि के दौरान अगर हम सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने की कोशिश करें तो इसका प्रतिकूल असर ही होगा.’

उन्होंने बताया, ‘जिन दिनों कोई जुलूस नहीं निकलता, हम चालान करने के साथ जुर्माना भी लगा रहे हैं.’

Hordes of people at the third shahi snaan Wednesday | Simrin Sirur | ThePrint
बुधवार को शाही स्नान के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालू और साधु संत पहुंचे/सिमरन सिरुर/दिप्रिंट

यद्यपि राज्य से बाहर से आने वाले लोगों के पास निगेटिव सर्टिफिकेट तो होते हैं लेकिन कुंभ अधिकारी नियमित तौर पर उनकी जांच नहीं करते. कोई भी निगेटिव सर्टिफिकेट सिर्फ तीन दिन के लिए ‘वैध’ होता है जिसके बाद संबंधित व्यक्ति को फिर जांच करानी पड़ती है. लेकिन इस आदेश का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है.

उदाहरण के तौर पर 25 साल की उम्र वाले युवाओं का एक समूह यहां ऋषिकेश में सिर्फ छुट्टियां मना रहे थे, उनके पास कोविड निगेटिव सर्टिफिकेट थे जो हरिद्वार आने के समय तक बेकार हो चुके थे.

इन पांच में से एक युवा अमित कुमार ने कहा, ‘हमारी निगेटिव रिपोर्ट की समयसीमा समाप्त मानी जाएगी, क्योंकि वे तीन दिन से अधिक पुरानी है. कुछ दिनों पहले जब हम सीमा पार करके यहां पहुंचे थे तो उनकी जांच की गई थी लेकिन यहां मेले में आने के बाद इसकी जांच नहीं हुई. साथ ही जोड़ा, ‘अगर वे हमसे कहते तो हम टेस्ट करा लेते लेकिन हमारे पास समय कम है, इसलिए हम इसका ज्यादा से ज्यादा आनंद उठाना चाहते हैं.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: रायपुर में बढ़ती कोविड मौतों के बीच कम पड़ गए शव वाहन, शवों को ट्रकों में भेजा जा रहा है श्मशान


 

share & View comments