प्रयागराज (उप्र), 10 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक वीडियो को लेकर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एमपीएलबी) की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष नूर अहमद अजहरी के खिलाफ दायर आपराधिक मुकदमा रद्द करने से इनकार कर दिया है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में अजहरी कथित तौर पर कहते हुए नजर आ रहे हैं कि भाजपा शासित राज्य मुसलमानों को डराने की कोशिश कर रहे हैं और इन राज्यों ने संविधान का उल्लंघन किया है। नूर ने माफिया अतीक और उसके भाई अशरफ की हत्या को सरकार का षड़यंत्र बताया है । उन्होंने कहा है कि संविधान में इस सरकार की कोई आस्था नहीं है।
इस वीडियो के बाद पीलीभीत जिले के पूरनपुर थाने में नूर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी और जांच के बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। पीलीभीत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 24 जुलाई, 2024 को उनके खिलाफ समन जारी किया।
अजहरी ने उच्च न्यायालय में मौजूदा याचिका दायर कर समन और अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमे को रद्द करने का अनुरोध किया।
यह याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने कहा, “संज्ञान लेने के इस चरण में एक अदालत का ध्यान यह निर्धारित करना होता है कि क्या प्रथम दृष्टया मामला बनता है अर्थात क्या यह साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं कि अमुक अपराध किया गया है।’’
अदालत ने कहा कि उक्त तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मौजूदा याचिका में दम नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।”
सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का प्रदेश अध्यक्ष हैं और अध्यक्ष की हैसियत से बोर्ड के विचार रखने के लिए वह कई समाचार चैनलों में चर्चा में हिस्सा लिया करते थे। उन्होंने प्रयागराज में अतीक और अशरफ की हत्या को लेकर अपने विचार व्यक्त किए थे।
उन्होंने कहा कि नूर ने अपने बयान में ऐसा कोई शब्द नहीं कहा जो धारा 505(2) (दो वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना पैदा करने वाला कथन) के तहत अपराध के दायरे में आता हो।
राज्य सरकार के वकील ने इस याचिका का पुरजोर विरोध किया।
भाषा सं राजेंद्र
राजकुमार
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