नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2005 में हिरासत में कथित हिंसा में हुई एक व्यक्ति की मौत से जुड़े मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(सीबीआई) की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के लिए सहमति दे दी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने आरोपियों को नोटिस जारी कर सीबीआई की याचिका पर उनका जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई 19 मई के लिए निर्धारित की।
सीबीआई ने केरल उच्च न्यायालय के अगस्त 2025 के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें निचली अदालत द्वारा पांच लोगों को दोषी ठहराने के आदेश को निरस्त कर दिया गया था। निचली अदालत ने इनमें से दो आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी।
मृत्युदंड पाने वाले आरोपियों में से एक की उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला उदयकुमार (28) की मौत से संबंधित है, जिसे सितंबर 2005 में पुलिस के दो अधिकारियों ने उस समय हिरासत में ले लिया था जब वह तिरुवनंतपुरम में अपने दोस्त के साथ खड़ा था।
आरोप है कि उदयकुमार को एक पुलिस थाने ले जाया गया और उसके बाद पास के सर्कल इंस्पेक्टर के कार्यालय में ले जाया गया, जहां उससे हिरासत में पूछताछ की गई जिसमें बल का प्रयोग किया गया और उसे चोटें पहुंचाई गईं।
बाद में उसी दिन उदयकुमार को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया और पोस्टमार्टम में दोनों जांघों पर गंभीर चोटें पाई गईं, जिन्हें मृत्यु का कारण माना गया।
अभियोजन का आरोप था कि यह मौत पुलिस हिरासत में हुई हिंसा और यातना का परिणाम थी।
अपने फैसले में, उच्च न्यायालय ने कहा था कि इस मामले में मुकदमा लंबी जांच के बाद चलाया गया था, जिसकी शुरुआत सीबी-सीआईडी और बाद में सीबीआई ने की थी।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही में बड़े विरोधाभास थे, साथ ही जांच में भी स्पष्ट रूप से खामियां थीं।
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