नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दैनिक समाचार पत्र के मालिक के खिलाफ एक वकील द्वारा दायर मामले में आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द कर दिया और कहा कि संबंधित लेख ठीक नीयत और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उपयोग करते हुए प्रकाशित किया गया था।
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि होशंगाबाद के प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा शिकायतकर्ता की दलीलों को खारिज करने संबंधी आदेश एक उचित है।
पीठ ने कहा, ‘हमने अपीलकर्ता की दलीलों पर विचार किया और निचली अदालतों के साथ-साथ उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों समेत रिकॉर्ड पर रखी गई सामग्री का अध्ययन किया है। विचाराधीन लेख ठीक नीयत से और भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत निहित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उपयोग करते हुए प्रकाशित किया गया था।”
शिकायत में कहा गया है कि ‘संडे ब्लास्ट’ नामक दैनिक समाचार पत्र के पंजीकृत मालिक आरोपी ने 24 फरवरी 2013 को एक लेख प्रकाशित करने की अनुमति दी थी जिसका शीर्षक था ‘एडवोकेट ने पान मसाला कारोबारी के खिलाफ दर्ज कराया झूठा मामला”
वकील ने होशंगाबाद के प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि अखबार के मालिक ने तथ्यों का पता लगाए बिना उक्त लेख को प्रकाशित करने की अनुमति दी, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
भाषा
जोहेब माधव
माधव
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
