नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पंजाब एवं हरियाणा विधिज्ञ परिषद के चुनावों में महिला अधिवक्ताओं को 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का शुक्रवार को आदेश दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वकीलों की कुल संख्या में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए राज्य विधिज्ञ परिषदों के निर्वाचित सदस्यों की संख्या बढ़ाने के निर्देश संबंधी अभ्यावेदन पर विचार करने के लिए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से भी सहायता मांगी।
पीठ ने देश भर में राज्य विधिज्ञ परिषदों में महिला अधिवक्ताओं के पर्याप्त प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के उपायों का अनुरोध करने वाली एक लंबित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश पारित किया।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिन राज्य विधिज्ञ परिषदों में अभी तक चुनाव अधिसूचित नहीं हुए हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी 30 प्रतिशत सीट महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित हों।
पंजाब और हरियाणा के मामले में इसने कहा कि चुनाव प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई थी और केवल अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी, इसलिए आरक्षण लागू करने का आदेश उचित है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम संतुष्ट हैं कि आठ दिसंबर 2025 के आदेश के पैरा 4 में ‘पंजाब और हरियाणा’ शब्दों के संबंध में दिया गया हमारा निर्देश हटाए जाने योग्य है, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है और केवल मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया गया है।’’
शीर्ष अदालत ने आठ दिसंबर, 2025 के अपने आदेश में टिप्पणी की थी कि चार राज्य विधिज्ञ परिषदों के चुनाव पहले ही अधिसूचित किए जा चुके हैं और ऐसे अग्रिम चरण में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित करना विवेकपूर्ण नहीं होगा।
हालांकि, मामले पर पुनर्विचार करने को लेकर पीठ ने पाया कि पंजाब और हरियाणा की स्थिति अलग थी, क्योंकि चुनाव प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।
भाषा
सुरेश माधव
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