scorecardresearch
Tuesday, 3 March, 2026
होमदेशन्यायालय ने शराब घोटाले के मामलों में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री लखमा को अंतरिम जमानत दी

न्यायालय ने शराब घोटाले के मामलों में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री लखमा को अंतरिम जमानत दी

Text Size:

नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस विधायक एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को कथित शराब घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य पुलिस द्वारा दर्ज दो अलग-अलग मामलों में मंगलवार को अंतरिम जमानत दे दी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस तथ्य पर गौर किया कि पूर्व मंत्री ईडी द्वारा 15 जनवरी 2025 को धनशोधन के आरोपों में गिरफ्तार किए जाने के बाद से जेल में हैं।

राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के भ्रष्टाचार-रोधी ब्यूरो (एसीबी) ने लखमा को दो अप्रैल 2025 को एक अलग मामले में गिरफ्तार किया था।

पीठ ने जमानत देते समय इस तथ्य पर भी गौर किया कि दोनों मामलों में जांच जारी है और इसके अलावा, शुरू होने वाले मुकदमों के दौरान अभियोजन पक्ष के सैकड़ों गवाहों से पूछताछ करनी होगी।

हालांकि, पीठ ने लखमा पर जमानत की कई शर्तें लगाईं और कहा कि पूर्व मंत्री को राज्य से बाहर रहना होगा और उन्हें सुनवाई की तारीखों पर अदालतों में पेश होने की अनुमति दी जाती है।

पीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि विधायक होने के नाते आरोपी को विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी जाए।

पीठ ने पूर्व मंत्री को निचली अदालत में अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया और उनसे कहा कि वह मामले के गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास न करें।

इसके अलावा, लखमा को मुकदमे की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों को अपना मोबाइल नंबर और ठौर ठिकाना बताना होगा।

न्यायालय ने ईडी और एसीबी/ईओडब्ल्यू को यह छूट दी कि यदि आरोपी जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है तो वे जमानत रद्द करने का अनुरोध कर सकते हैं।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की जमानत याचिकाएं मंजूर की थीं। ये दोनों मामले ईडी और छत्तीसगढ़ एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज किए गए थे।

ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ था, जब राज्य में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी।

ईडी का आरोप है कि इस घोटाले के कारण राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और शराब गिरोह के लाभार्थियों की जेबें भर गईं।

ईडी के अनुसार, चैतन्य बघेल कथित शराब घोटाले में लिप्त गिरोह के सरगरना थे और उन्होंने इस घोटाले से प्राप्त लगभग 1,000 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत रूप से प्रबंधन किया।

एसीबी/ईओडब्ल्यू ने दावा किया है कि चैतन्य बघेल ने अपराध से प्राप्त रकम का अन्य लोगों के साथ मिलकर उच्च-स्तर पर प्रबंधन किया और अपने हिस्से के रूप में लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये प्राप्त किए।

राज्य एजेंसी ने दावा किया था कि इस घोटाले से जुड़ी अपराध से अर्जित आय 3,500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।

भाषा सुभाष सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments