नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने पिछले सप्ताह आतंकी साजिश मामले में सात विदेशी नागरिकों की एनआईए हिरासत बढ़ाते हुए इस मामले को संवेदनशील बताया और कहा कि आरोपियों के भारत आने के उद्देश्य जैसे कई सवालों के जवाब जरूरी हैं। विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 27 मार्च के अपने आदेश में कहा, “आपत्तिजनक सामग्री की बरामदगी न होने के मुद्दे पर, इस मामले के तथ्यों को समग्र रूप से समझना होगा। आरोपी भारत क्यों आए। वे म्यांमा क्यों गए। ड्रोन का उपयोग करने के पीछे उनका उद्देश्य क्या था। क्या आरोपियों ने किसी व्यक्ति को प्रशिक्षण देने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया।’’
अदालत ने कहा, “क्या भारत का कोई व्यक्ति या किसी विद्रोही समूह का सदस्य आरोपियों से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़ा है। भारत और इसके बाहर यात्रा के दौरान आरोपियों ने किस प्रकार की सुविधाओं या साधनों का उपयोग किया।”
न्यायाधीश ने रेखांकित किया, “इस तरह के और भी कई सवालों की पड़ताल आवश्यक है।”
आरोपियों से 10 दिन की हिरासत में पूछताछ की अनुमति देते हुए उन्होंने कहा, “मामले की डायरी में दर्ज तथ्यों के आधार पर मैं जांच एजेंसी से सहमत हूं कि यह मामला अत्यंत संवेदनशील प्रकृति का है।”
न्यायाधीश ने निर्देश दिया कि हिरासत में पूछताछ पूरी होने के बाद छह अप्रैल को आरोपियों को पेश किया जाए।
उन्होंने इस मामले में सुनवाई यहां राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के मुख्यालय में की।
इससे पहले, उन्होंने आरोपियों में शामिल छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक के खिलाफ न्यायिक कार्यवाही एजेंसी मुख्यालय में संचालित करने की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा था कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के उल्लंघन से संबंधित है और इसकी जांच अत्यंत संवेदनशील है, जिसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी हो सकते हैं।
अदालत ने 16 मार्च को आरोपियों को 11 दिन के लिए जांच एजेंसी की हिरासत में भेजने की अनुमति दी थी।
इन आरोपियों की पहचान मैथ्यू आरोन वैन डाइक, हुरबा पेत्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारिया, होंचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर के तौर पर हुई है। इनमें से डाइक अमेरिकी नागरिक है जबकि शेष छह लोग यूक्रेन के नागरिक हैं।
अदालत के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को आरोपियों ने निष्पक्ष न्यायिक कार्यवाही के लिए एक स्वतंत्र अनुवादक की मांग करते हुए आवेदन भी दायर किया।
इससे पहले 16 मार्च को प्रस्तुत रिमांड आवेदन में जांच अधिकारी ने प्राथमिकी का हवाला देते हुए कहा कि कुछ यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तिथियों पर पर्यटक वीज़ा पर भारत आए और गुवाहाटी पहुंचे, जहां से वे आवश्यक दस्तावेज़ जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट या संरक्षित क्षेत्र परमिट लिए बिना मिजोरम चले गए।
अधिकारी के अनुसार, इसके बाद ये लोग अवैध रूप से म्यांमा में घुसकर वहां के जातीय सशस्त्र संगठनों को पहले से निर्धारित प्रशिक्षण देने गए थे।
आरोपियों की एनआईए हिरासत को मंजूरी देते हुए अदालत ने कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को टुकड़ों में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें समग्र रूप से समझना आवश्यक है।
आदेश में कहा गया कि ये आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के हितों से जुड़े हुए हैं तथा व्यापक रूप से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 (साजिश के लिए दंड) के तहत आते हैं।
भाषा रंजन नेत्रपाल
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