नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश के चर्चित व्यापम घोटाले का भंडाफोड़ करने वाले आनंद राय के खिलाफ जाति आधारित हिंसा से जुड़े आरोपों को मंगलवार को खारिज कर दिया।
आनंद राय ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2022 में एक रैली के दौरान एक सांसद, एक विधायक और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कथित हिंसा और अपशब्द कहने से जुड़े मामले में उनके खिलाफ अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोप तय किए जाने को बरकरार रखा गया था।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. के. सिंह की पीठ ने राय की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा, “हमने एससी/एसटी अधिनियम के दायरे पर विचार किया है और यह कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं है। अपील स्वीकार की जाती है।”
मध्यप्रदेश के नेत्र रोग विशेषज्ञ और व्यापम परीक्षा घोटाले का भंडाफोड़ करने वालों में शामिल आनंद राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी ने पक्ष रखा।
यह घटना 15 नवंबर 2022 को मध्यप्रदेश के रतलाम जिले के धारड़ गांव में हुई थी, जहां भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा के अनावरण के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था।
आरोप था कि राय ने एक सांसद, एक विधायक, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों के वाहनों को रोक लिया था। विकास पारगी नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कहा गया था कि एक समूह ने करीब एक घंटे तक सड़क जाम कर दी, जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्रता की और रास्ता साफ कराने पहुंचे पुलिसकर्मियों से हाथापाई की।
प्राथमिकी में आनंद राय सहित लगभग 40 से 45 लोगों के नाम दर्ज थे।
रतलाम के विशेष सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी अधिनियम) ने 18 मार्च, 2025 को राय के खिलाफ अभियोग तय किए थे।
इससे पहले, 13 जनवरी, 2023 को उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में आनंद राय को जमानत दे दी थी और बाद में एससी/एसटी अधिनियम के तहत जारी सुनवाई पर रोक लगा दी थी।
भाषा खारी वैभव
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