प्रयागराज, सात अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक इंसान को पीएचडी की डिग्री और सहायक प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के बहाने 22 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने की आरोपी महिला के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया है।
प्रियंका सेंगर नामक एक महिला की रिट याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि भ्रष्ट व्यवस्था में विश्वास करने के कारण एक शिक्षित महिला भी धोखे का शिकार हो गई।
खंडपीठ ने कहा, “यह समाज में नैतिक मूल्यों के बेहद निचले स्तर को दर्शाता है और समाज में कुछ हद तक नैतिकता को पुनः बहाल करने के लिए इस प्रकार के अपराधों को बिना दंड के नहीं छोड़ा जाना चाहिए।”
तथ्यों के मुताबिक, तान्या दीक्षित ने कानपुर में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि प्रियंका सेंगर और सह आरोपियों- विक्रम सिंह सेंगर, तृप्ति सिंह सेंगर और सान्या सिंह सेंगर ने उसे आश्वस्त किया कि अलीगढ़ स्थित एक विश्वविद्यालय में उसका पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश कराया जाएगा।
आरोप है कि इन लोगों ने दीक्षित से यह वादा भी किया कि वे कानपुर में एक विश्वविद्यालय में उसके लिए सहायक प्रोफेसर की नौकरी भी सुनिश्चित करेंगे। इन आश्वासनों पर विश्वास कर दीक्षित और उसकी मां ने इन आरोपियों के बैंक खातों में कुल 22,18,000 रुपये डाल दिये। हालांकि शिकायतकर्ता ने नौकरी या अकादमिक कार्यक्रम के लिए कभी आवेदन नहीं किया।
आरोपों के मुताबिक, जून, 2024 में इन आरोपियों ने शिकायतकर्ता को पीएचडी का अंक पत्र, एक प्रवेश पत्र, विषय मंजूरी पत्र और यहां तक कि कानपुर स्थित विश्वविद्यालय से एक नियुक्ति पत्र समेत फर्जी दस्तावेज उसे सौंपे। नियुक्ति पत्र में शिकायतकर्ता को जुलाई में कार्यभार ग्रहण करने को कहा गया था।
लेकिन जब शिकायतकर्ता नियुक्ति पत्र के साथ विश्वविद्यालय पहुंची तो विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने उसे बताया कि ये सभी दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी हैं और उन पर हस्ताक्षर भी फर्जी हैं।
जब शिकायतकर्ता ने इन आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दी तो उन्होंने उसे जान से मारने और गंभीर अपराधों में झूठा फंसाने की धमकी दी। इसके बाद, तान्या दीक्षित ने 14 सितंबर, 2024 को कानपुर के स्वरूप नगर थाने में भादंसं की धारा 420 (धोखाधड़ी) एवं अन्य सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया।
उच्च न्यायालय ने 31 मार्च को दिए निर्णय में कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों से समाज में बेहद भयावह प्रवृत्ति का खुलासा होता है जहां आम आदमी के मन में यह धारणा बन गई है कि रिश्वत देकर कुछ भी करवाया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश या एक विश्वविद्यालय में अध्यापक के पद पर नियुक्ति, नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया के बगैर नहीं की जा सकती।
अदालत ने कहा कि इन आरोपों की पुलिस द्वारा निष्ठापूर्वक गहराई से जांच किए जाने की जरूरत है।
भाषा सं राजेंद्र
राजकुमार
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